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जिनिगी पहाड़ हो गईल

“जिनिगी पहाड़ हो गईल” डॉ. गोरखनाथ ‘मस्ताना’ के भोजपुरी कविता संग्रह हटे, जवना के प्रकाशन सन् 2008 में इंद्रप्रस्थ भोजपुरी परिषद्, RZH/940, राज नगर-2, पालम कॉलॉनी, नई दिल्ली-110045 से भइल बा. एकर कीमत 200 रुपिया बाटे.

भोजपुरी कविता के रंगीन चुनरी के रंगरेज मस्ताना जी के मए कविता पढ़े आ गुनगुनाए जोग बाड़ी सन. अभावो में भाव के सर्जना करेवाला एह कवि के मस्ती में कतहीं कमी नइखे लउकत-

जिनिगी जियेला चाहीं मुट्ठी भर अँजोरिया

ओतने ही कि जेतने में कट जाय उमिरिया

(“जिनिगी पहाड़ हो गईल” से)

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

ramraksha.mishra@yahoo.com

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