समीक्ष्य कृति : भोजपुरी जिंदगी (त्रैमासिक पत्रिका)
प्रकाशन अवधि : अक्टूबर-दिसंबर, 2010 वर्ष : 1 अंक : 1
सहयोग : 25 रुपए / सालाना : 100 रुपए
प्रधान संपादक : डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना संपादक : संतोष कुमार
प्रकाशन संपर्क : आर जेड एच/940, जानकी द्वारिका निवास, प्रथम तल, राजनगर-2, पालम कॉलोनी, नई दिल्ली-110077

भोजपुरी जिंदगी (त्रैमासिक पत्रिका) के पहिल अंक आ बिशेषांक. संपादक मिर्जा खोंच पर केंद्रित ई प्रवेशांक अपने आप में एगो शोध सामग्री बा. एह में ना खाली मिर्जा खोंच जी के प्रमुख कवितन का सङे उहाँके व्यंग आलेखन के प्रकाशित कइल गइल बा बलुक उहाँके बातचीत भी शामिल कइल गइल बा. एहसे अंक अपने आप में पूर्ण हो गइल बा.

प्रधान संपादक डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना के टिप्पणी भोजपुरी के कर्ज मानेवाला मिर्जा खोंच के व्यक्तित्व आ कर्तृत्व पर एगो आत्मीयता आ विद्वत्ता से भरल संक्षिप्त प्रबंध बन गइल बा. “संपादकीय के बहाने” में संपादक संतोष कुमार के टिप्पणी व्यंग्य आ भोजपुरी व्यंग्य साहित्य पर एगो बेहतर आलेख हो गइल बा.

“इग्नू में भोजपुरी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति का अध्ययन” आलेख पत्रिका के एगो थाती बा. “थोरे लिखनी जादे समुझिहऽ” के तर्ज पर भोजपुरी का बारे में बढ़िया जानकारी मिल जाता आ इग्नू के तत्संबंधित पाठ्यक्रमन पर घलुआ अलग से. प्रो. शत्रुघ्न कुमार के कविता “इतिहास” सचमुच आकर्षक शैली में एगो गौरवपूर्ण इतिहास बा. मिर्जा खोंच के व्यक्तित्व आ कर्तृत्व से संबंधित मंजर सुल्तान, एम एम वफा, ज्ञानेश्वर गुंजन आ सुरेश गुप्त के परिचयात्मक लेख सारगर्भित बाड़े सन. दिलीप कुमार के इंटरव्यू लिहला के अंदाज नीमन लागल. “घुसपैठिया” में भोजपुरी के विकासशील कदमन पर जीभ से लार चुआवत तथाकथित साहित्यकारन के पैजामा नीमन से खोलल गइल बा. “नथुनिया पर गोली मारे में” झुलनी पर शहीद होखे के लेखक के प्रस्ताव काबिले गौर बा.

काल्हु जब मिर्जा खोंच पर केहूँ जो शोध कइल चाही त ओकरा जरूर एह अंक से भरपूर मदद मिली. ई कहल ढेर ठीक होई कि ई अंक ओकरा खातिर दीपक के काम करी. बहुत जरूरी बा अइसन साहित्यकारन आ कलाकारन के खोजल आ उनका पर काम करल. एह तरह के काम के जतना बड़ाई कइल जाव ओतना कम बा. “जे ना खाई माल उपर के/बाद में मिर्जा ऊ पछिताई.” का स्वर में हम कहल चाहबि कि एह अंक के जरूर पढ़ल जाएके चाहीं.

समीक्षक
: डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

ईमेल : ramraksha.mishra@yahoo.com

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