एगो, एकगो, आ एकेगो का चक्करघिन्नी में (बतकुच्चन – 198)

एगो, एकगो, आ एकेगो का चक्करघिन्नी में कई दिन से दिमाग में चकोह जस चलत बा आ हम ओहीमें खिंचाइल चलल जात बानी. थाह नइखे लागत कि कइसे एह चकोह से बहरी निकलीं. हिन्दी वाले त एह मामला में एक ही शब्द एक बना के निकल गइलें बाकिर भोजपुरी में त एगो आ एकगो का साथही एकेगो के चरचा भरल बा. कब कहाँ कवना के इस्तेमाल कइल जाव, कब कवन मतलब निकालल जाव एही में अझूरा के रहि गइल बानी. खोजबीन करे लगनी त एको ब्रह्म द्वितियो नास्ति का बाद अहं ब्रह्मास्मि पढ़े के मिल गइल आ दिमाग अउरी घुरचियाह हो गइल. अंगरेजी में ए आ वन के कन्फ्यूजन कुछ कुछ एही तरह के होला बा‏किर ऊ लोग अपना समस्या के हल निकाल लिहले बा आ तय कर लिहले बा कि कहाँ ए लागी आ कहाँ वन. बाकिर तबहियों ओहिजो कुछ ना कुछ भरम बाकी रह गइल बा आ इस्तेमाल कवना तरह से कइल गइल बा एकरा के धियान में राखे के पड़ेला. बाकिर भोजपुरी में अतना माथ बा कि केहु कुछ तय ना कर पावे. सभके आपने भोजपुरी सबले नीमन लागेला आ एह फेर में आजु ले धेयान आ धियान में का सही मानल जाव, भइल लिखाव कि भईल, गइल लिखाव कि गईल अइसनो सवालन के जवाब पर एकमत नइखे बनि पावल. भी के इस्तेमाल लेके त कुछ विद्वान खूंटा गाड़ देलें कि भी के इस्तेमाल करबे करब त कुछ लोग अतना जिद्द करेला कि हर हाल में भी के भीति तूड़ के राख देला. आपस में चरचा करे के आदते ना होखे भोजपुरिहन के. सभे अपना के विद्वान आ दोसरा के अइसहीं भाव मारेवाला आदमी मान बइठेला. सभे अपना अपना इनार के बेंग जइसन बन के रहि गइल बा. खैर एहसे हमरा का? हम त एगो आ एकेगो का फेर में फँसल बानी आ एकरे जवाब हमरा नइखे भेंटात. त चलीं एकर इस्तेमालो देख लीहल जाव. सड़क हादसा में एगो आदमी कचरा गइल. एहिजा एगो आदमी के मतलब निकलल कि कचराए वाला आदमी रहुवे कवनो दोसर जानवर ना. जबकि बस में बइठल एगो सवारी के मौत एह हादसा में हो गइला के मतलब भइल कि बस के सवारियन में से एक गो आदमी के मौत हो गइल. बाकिर हर जगहा एकगो लिखल ना जाव आ बोले में एकगो कब एगो हो जाला पते ना चल पावे. आ जब एके गो के चरचा होखे त मान लीं कि संख्या तय बा बस एक गो! एह एगो के मामिला एको ब्रह्म आ अहं ब्रह्मास्मि कहि के अउरी अझूरा दीहल गइल. राजनीति के बात करीं त सत्ता में बइठल गोल में पता ना कतना अहं ब्रह्मास्मि लोग बइठल बा. घर के पुरनियन लेखा बरामदा में खटिया दे के बइठा दीहल गइल बा बाकिर बुढ़ऊ के मन मानत नइखे आ ऊ जब मौका मिले बईठका में धमके से बाज नइखन आवत. उनका मन मे अहं ब्रह्मास्मि के बात अतना गहिरा पइठल बा कि निकलले नइखे निकलत. विरोधी दल में सबले खास दल में एह तरह के कवनो कंफ्यूजन नइखे. ओह गोल के सभे मानेला कि एको ब्रह्म द्वितियो नास्ति आ ओहिजा केहु के भरम नइखे कि अहं ब्रह्मास्मि. एहसे ओहिजा कवनो खटपट होखे के गुंजाइशे नइखे. सरकारिओ गोल ले लोग सचाई सकार लेव त ओहु लोग के कल्याण हो सकेला कि ओह गोल में एके गो ब्रह्म बाड़न बाकिर केहु दोसरा के कवनो बेंवत नइखे त बहुते मामिला सहजे सरिहा लीहल जा सकी. बाकिर समस्या एके गो नइखे, पूरा गोले कबो कबो एगो समस्ये लागे लागेला.

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