चुनाव कपारे पर बा आ नेता लोग परेशान हो चलल बा. कबो कुछ गलत बात कह देत बा त कबो गलती से कुछ बात निकल जात बा. आ सोचब त रउरो मान जाएब कि गलत बात कहल आ गलती से कवनो बात कह दीहल दुनु अलग अलग बात होला. हमरा बतकुच्चन में कुछ बात कबो गलत कहाइल होखे त हम मान लेब बाकिर कवनो बात गलती से कह दिहले रही, ई बात हम ना मानब. काहे कि जवन कुछ कहीले ओकरा के कई दिन ले सोचीले समुझीले, मने मन दोहराइले आ तब कहीले. ठीक वइसही जइसे प्रोफेसर लेक्चरार मास्टर लोग घर में घंटो पढ़ेला तब जा के पैंतालिस मिनट के एक घंटी पढ़ा पावेला लोग. एगो पढ़ल बात याद आवत बा कि जबले कवनो कागज पढ़ ना लीं तब ले ओह पर दस्तखत ना करीं आ जब ले ठीक से देख ना लीं तबले कवनो चीज पीहीं मत. ठीक ओही तरह भारतीय प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियो लोग के अतना त सिखावले जाला कि कवनो कागज पर दस्तखत करे से पहिले ओकर मजमून जरूर पढ़ लीं आ ओकरा बादे दस्तखत करीं.

बाकिर पिछला हफ्ता यूपी में एगो गजब बात हो गइल. प्रदेश के गृह सचिव के दस्तखत से जारी एगो चिट्ठी लीक हो गइल आ ओकरा बाद जवन बतंगड़ खड़ा भइल से फेलिन चक्रावात का चलते बहुत बड़हन बँड़ेरा ना बन सकल. सगरी मीडिया लागल रहे फेलिन चक्रावात कवर करे में आ एहिजा यूपी में उठल एगो बँड़ेरा के ओतना चरचा ना हो पावल. बाकिर चिट्ठी के बात लीक होखला का तुरत बाद प्रमुख सचिव सामने अइले आ कहलन कि गलती से चिट्ठी पर ऊ बात लिखा गइल जवन लिखाइल ना चाहत रहुवे. अब हमरा जइसन बतकुचनिया पूछल चाहत बा कि का सचहू बात गलती से लिखा गइल रहे बाकिर बात गलत ना रहे. काहे कि प्रमुख सचिव गृह के खंडन में एको बेर ई बात ना आइल कि बतिये गलत रहे. ऊ त इहे कहलन कि गलती से लिखा गइल रहे. अब अगर भाजपा एह पर हल्ला मचावे त कवन गलती कि सरकार चाहत बिया कि बहुसंख्यकन का बीच भरम पैदा होखे कि सरकार त चाहत बिया मंदिर बनवावे के बाकिर बनवा नइखे पावत.

बतकुच्चन में हमार हमेशा कोशिश रहेला कि राजनीति से दुरी बनवले राखल जाव बाकिर राजनीति आजु समाज के हर अंग पर असर डाले लागल बिया आ भाषा के चरचा करतो में एह बहाने भा ओह बहाने कुछ ना कुछ राजनीति आइए जाला. आजुओ जोर एह बात पर बा कि गलत बात कुछ अउर होला आ गलती से कहल कवनो बात कुछ अउर. गलत बात जान के कहाव भा गलती से, गलते होला. बाकिर सही बात कबो अनजाने कहा गइला के कहल जाला कि गलती से कहा गइल. कहे के मतलब कि बात गलत ना रहल बाकिर कहल गलत हो गइल. एहीसे हमनी कीहाँ नारी के लाख प्रताड़ना करतो कहल जाला कि नारी देवी होले आ जनम से आन्हर के नाम सूरदास राख दिआला.

अब रउरा सभे सोचत रहीं कि यूपी के गृह सचिव वाली चिट्ठी गलत रहे कि गलती से रहे. हम फेर दोहरवले जात बानी कि हम कुछ गलत भले कह गइल होखीं, कुछउ गलती से नइखी कहले. जवन कहले बानी, जवन कहेनी सोच समुझ के, गलती से ना.

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