आजु बतकुच्चन करे बइठनी त धेयान में टेंटीहा, लरछूत, आ पराछूत जइसन शब्द घूमे लागल. कारण कि आजु के माहौल में जेने देखी तेनिए टेंटीहा, लरछूत आ पराछूत लउक जइहें. केहूं इनका के टेंटीहा कही त केहू हुनका के. अब एहसे पहिले कि टेंटीहा, लरछूत, आ पराछूत के मतलब खोजे बतावे चलीं ई जरूरी लागल कि जान लिहल जाव कि स्लैंग का होला.

विद्वानन के कहना ह कि स्लैंग हर भाषा में मिलेला आ कुछ विद्वान त इहो कहेलें कि स्लैंग भाषा विकास के सीढ़ी होले. आ मजे के बात ई कि खुद स्लैंगे के मतलब बदल गइल बा एह घरी. स्लैंग ड्रग बेचला के कहल जाए लागल बा. स्लैंग ला हिन्दी भा संस्कृत में शब्द खोजे चलीं त एकरा के अविकसित शब्द कहल जा सकेला. जब कवनो ध्वनिसमूह के कवनो मतलब ना निकले त ऊ आवाज भा ध्वनिए भर रह जाला बाकिर जब ओकर मतलब निकले लागेला त ऊ शब्द बन जाला. त ध्वनिसमूह से शब्द बने का बीच का दौर में कुछ ध्वनिसमूह कुछ लोग ला शब्द होला आ अधिका लोग ला स्लैंग. स्लैंग के परिभाषा पढ़े चलनी त मिलल कि अनौपचारिक बातचीत में कवनो शब्द के लगातार बदलत मतलब आ इस्तेमाल के स्लैंग कहल जाला. कुछ स्लैंग बीसियन बरीस से मौजूद बाड़े त कुछ साले छह महीने आपन मतलब बदल लेले भा बिला जाले.

अपना के ढेर पढ़ल लिखल माने वाला कुछ बेवकूफ लोग स्लैंग के अशिक्षा के उपज बतावेले आ गइल बीतल नवहियन के काम समुझेलें जबकि सच्चाई एकरा से बहुते फरका बा. जइसे कि शुरुए में कहनी कि स्लैंग शब्द विकास के एगो दौर ह. जबले कवनो शब्द सभका इस्तेमाल भा समुझ का दायरा में ना आ जाव तबले ओकरा के स्लैंग, अविकसित शब्द, मानल जाला. बाकिर एह परिभाषा पर त बहुते शब्द स्लैंग मान लिहल जाई काहे कि अधिकतर शब्दन के माने जानेला हमनी के शब्दकोष भा डिक्शनरी के सहायता लिहल करीले. बहुत शब्द समय समय पर गढ़ात रहेला आ गँवे गँवे ओकर इस्तेमाल के दायरा बढ़त जाला आ एक समय ऊ सर्वमान्य शब्द बन जाला. कहल गइल बा कि ई हर शिक्षित आदमी के जवाबदेही होखे के चाहीं कि ऊ भाषा के लगातार विकास में आपन सहयोग देत रहो आ पुरान पड़ल जात शब्दन के नया नया अर्थ निकालत जाव भा जरूरत पड़ला पर ओकरा के गढ़त चल जाव.

हाल फिलहाल दू गो शब्द स्लैंग से विशेषण भा संज्ञा ले बन जाए का राह पर बाड़ी स. ई शब्द हई सँ फेंकू आ पप्पू. फेंकू भा पप्पू सुनते सभे का दिमाग में खास खास आदमी के चेहरा धेयान में आवे लागल बा. फेंकू आ पप्पू अतना ज्यादा इस्तेमाल में आ गइल बा कि एकरा के स्लैंग ना मान के विशेषण मानल जा सकेला. अब के फेंकू आ के पप्पू के राजनीति में पड़ल हम ना चाहब काहे कि आजु के शुरुआते हम टेंटीहा, लरछूत आ पराछूत से कइले बानी. टेंटीहा माने कि लड़ाकू आ लड़ाकूओ में वइसन लड़ाकू जे बहाना खोज खोज लड़े ला तईयार रहे आ ना मिले तबहियों सामने वाला के मजबूर कर देव लड़े ला. रहल बात लरछूत आ पराछूत के त जब केहू अपना फायदा ला सामने वाला के नुकसान चहुँपवले बिना जोंक का तरह सटल रहे त ओकरा के लरछूत कहल जाला. अइसन चमोकन जे छोड़वले ना छुटे. आ पराछूत जे अपना फायदा ला सामने वाला के नुकसानो करावे के तइयार ओकरा पाछा पड़ल होखे. सोच के देखीं त रउरो अगल बगल कुछ टेंटीहा, लरछूत, पराछूत भेंटा जइहें.
(२९ सितंबर २०१३)

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