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अइसन कबो ना होखे जब हम बतकुच्चन लिखे से पहिले मगजमारी करत शब्द कोश भा व्याकरण के किताब ना पलटत होखीं. कबो नया नया कुछ खोजे ला त कबो दिमाग में आइल कवनो बात के आधार बनावे ला. अबकियो उहे भइल. पिछला दिने एगो राजनीतिक अखबार के संपाक लिख मरले रहले कि अगर उनकर गोल के समर्थन ना रहीत त नरेन्द्र मोदी के बापो ना जीता सकत रहले उनुका के. बेचारा संपादक! पता ना नोकरी बाचल कि ना बाकिर टीवी चैनल का पैनल में नइखन लउकत एह घरी.

बात त ऊ एगो कहाउत में कहले रहले बाकिर मतलब निकाले वाला बतकुचनो के बाप रहलें आ उनुका बात के अस छीछालेदर भइल कि पूछी मत. गाड़ी का नीचे दबाइल कुकुरो पीछे छूट गइल. खैर हम सोचनी कि बाप के निरुक्ति देखल जाव कि बाप शब्द कइसे बनल, कहाँ से बनल. आ जान जाईं कि हमरो अचरज भइल कि बाप शब्द कवनो दोसरा भाषा से नइखे आइल सीधे संस्कृत के वाप: से बनल बा बाप. अब अगर हम सीधे बात बता दीं त बतकुच्चन कइसे होखी. पहिले त ई बतावल जरूरी लागत बा कि निरुक्ति का होला. आम मनई त निरुक्ति के मतलब इहे निकाली कि जवन कहल ना गइल होखे उहे निरुक्ति कहाला. निरुक्त कहल जाला वेद के व्याख्या के आ निरुक्ति कहल जाला कवनो शब्द के व्युत्पति देखावे के. निरुक्त के मतलब होला जवन साफ साफ ना कहल गइल होखे. शब्दन के उत्पतिओ सभका मालूम ना होखे आ कई बेर जानलो जरुरी ना होखे.

एही पर हमरा गाड़ी के ड्राइवर आ ओकर सवारी के उदाहरण दिमाग में नाचे लागल. गाड़ी के सवारी के एहसे मतलब ना होखे कि गाड़ी कइसे चलेले, ऊ त बस अतने जान के संतुष्ट रहेला कि ड्राइवर जानत होखी. बाकिर गाड़ी चलावे के कुछ नियम कायदा होखेला आ ओह नियम कायदा के थोड़ बहुत जानकारी सभे के होखे के चाहीं. भाषा का संगहु ठीक इहे बात ह. पढ़े सुने वाला मान के चलेला कि लिखनिहार भा वक्ता भाषा के नियम जानत समुझत बा. गाड़ी चलावे के नियम का तरह भाषा के इस्तेमालो के नियम होखेला आ ओकरे के व्याकरण कहल जाला. अगर हर आदमी अपना मन मर्जी से गाड़ी चलावे लागे त सोचीं कि सड़क पर कतना बवाल मच जाई. ठीक ओही तरह हर लिखनिहार आ बोलनिहार के भाषा के नियम जाने माने के चाहीं. अब एही उदाहरण के कुछ आगे बढ़ाई त कह सकींले कि साइकिल चलावे ला ड्राइविंग लाइसेंस होखल जरुरी ना होखे बाकिर वाहन चलावे ला आ खास क के सार्वजनिक वाहन चलावे वाला के लाइसेसी होखल जरूरी होला. मीडिया में लिखे बोलेवालन का साथे इहे नियम लागू होला. अगर ऊ व्याकरण के अनदेखी करीहें त भाषा का डगर पर बवाल मचहीं के बा!

अब लवटत बानी बाप पर. बाप शब्द बनल वाप: से. वापति वाप:. बोएला बोएवाला. औरत खेत होले आ पुरुष बोएवाला. बीज शब्द के व्युत्पति वीर्ये से भइल होखी. से बोएवाला वाप: आगा चलि के बाप बनि गइल. बाकिर चूँकि ई शब्द व्यंजना में बनल एहसे सभ्य समाज एकरा के ना अपनावल आ ओहिजा पिता शब्द के इस्तेमाल सर्वमान्य हो गइल. बाकिर भोजपुरी में त बाप बापे रहि गइले. बापे पूत परापत घोड़ बहुत नहीं त थोड़ा थोड़ा. बाप का बारे में जान लिहला का बाद मन भइल कि बेटो का बारे में जान जाइल जाव. त पता चलल कि बेटा शब्द एगो लमहर सफर तय करत पोत: से आइल बा. पोत: से बोटा, बोटा से बेटा. बोटा माने नाव जवना के अंगरेजिओ में बोट कहल जाला. बेटा बाप के तारेला एहसे उ पोत, बोटा, बेटा कहाए लागल.

ई सब जान समुझ के एगो लर दिमाग में आ गइल – अर्थ, अनर्थ, कुअर्थ, समर्थ, व्यर्थ, तदर्थ वगैरह के. बाकिर अब एह पर बतियावे लागब त जगहा छोट पड़ जाई. एहसे फेर कबो.

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