उर्दू के जानकार जानेलें कि कइसे नुक्ता का हेर फेर से खुदा जुदा हो सकेलें. उर्दू के एगो खासियत ह कि बहुते मात्रा लिखल ना जाव बूझ लिहल जाला. जे जानकार होला से त बड़ा आराम से पढ़ ली बाकिर नवसिखिया आदमी भुलाए गड़बड़ाए लगीहें. एक जमाना में जब लोग के आदत रहुवे किताब पत्रिका पढ़े के तब के बात ह. समाचार पत्रिका दिनमान में शमशेर बाहादुर सिहं उर्दू सिखावत रहलें आ उनका लिखला का चलते हमहू थोड़ बहुत अलिफ बे ते सीखे लागल रहनी. भाषा कवनो मजहब के ना होखे समाज के होला. अब रउरा सभे सोचत होखब कि आजु ई हम कवन पचरा ले बइठनी. से लवटत बानी बतकुच्चन का तरफ. आजु के बतकुच्चन ला भूमिका बनावे खातिर नुक्ता वाला चरचा जरूरी रहुवे. भाषा के खासियत होला कि गिनले चुनल वर्ण से पता ना कतना शब्द बना लेले. अंगरेजी में छब्बीसे गो वर्ण बा बाकिर शब्द गिने चलब त हजारों मे मिल जाई आ मतलब लाखो में.

दोसरा भाषा जइसने भोजपुरीओ में ई खासियत बा. तनी मनी विराम अर्धविराम का फेर में अर्थ के अनर्थ होखत देर ना लागे. बाकिर कुछ शब्दन के प्रयोग में हमनी का अकसर लापरवाही बरत दीहिले जा. जइसे कि बाकि आ बाकी में. एह बात के हम पहिलहू रेघरिया चुकल बानी बाकिर आजु फेर दोहरावे के मन कर गइल काहे कि बड़का बड़का साहित्यकारो लोग का लेखनी में ई लापरवाही देखे के मिल जा ता. वइसही भोजपुरी के एगो खासियत के आए दिन दुरुपयोग होत रहेला जइसे कि विकारी चिह्न के. एहिजो ध्यान दिहला के जरूरत होखी. चिह्न आ चिन्ह. चिह्न चिन्हे में मदद करे ला अपना चिन्हासी से. कहल गइल बा कि ना चिन्ह त नया कीन. मतलब कि अगर रउरा कवनो चीझ क बारे में पूरा जानकारी ना राखीं त बढ़िया रही कि नया खरीद लीं. पुरान सेकन्डहैन्ड जानकारन ला होला. अब चिन्हे आ चिह्न के बात हो चुकल त चलीं लवटल जाव विकारी चिह्न पर.

विकारी चिह्न अंगरेजी के ऽ जइसन होला आ एकरा के लगावे के मतलब होला कि पहिले वाला वर्ण पर तनी जोर दिहला के जरूरत बा. एकर महत्व जाने के होखे त रहता आ रहऽता के फेर देख लीं. बाद वाला रहऽता के मतलब भइल कि रह ता जबकि पहिले वाला रहता रास्ता ला इस्तेमाल होखी. एहसे अगर सही जगह विकारी चिह्न ना लगावल गइल त मतलब समुझे में दिक्कत आ सकेला. बाकिर एह विकारी चिह्न के कई बेर अतना बेसी इस्तेमाल होखे लागेला कि उहो ओतने बाउर लागे लागेला जतना राजनीति में सेकूलरिज्म के इस्तेमाल. दाल में नीमक डालल जरूरी होला. बे नीमक के दाल बेसवाद लागी बाकिर एकर मतलब ई ना कि भर दाल नीमके डाल दिहल जाव. सेकूलरिज्म के बेजा इस्तेमाल सेकूलर के अवधारणा के कमजोर कर दी. वइसंहीं विकारी चिह्नो के इस्तेमाल. हम कवनो तरह व्याकरण के जानकार ना हईं बाकिर शब्दन के सही इस्तेमाल के एगो कामन सेंस का हिसाब से बतियाइले. सोचीलें कि विद्वान लोग रिएक्ट करो त कुछ आपनो जानकारी बढ़ो. अब विकारी चिह्न के इस्तेमाल का बारे में सोचे लगनी कि अगर एकरा जगह ओह शब्दन के अलग अलग लिखल जाव तबो काम चल सकेला. बाकिर एहिजा फेर सावधान रहे के पड़ी. काहे कि कहे ला आ कहेला के मतलब बदल जाला. कहेला मतलब कह ता जबकि कहे ला के मतलब होला कहने के लिए. आ अब चलता आ चल ता के उदाहरण देत कहल चाहब कि हम चलता ना हईं बाकिर अब चलऽतानी. आ एह आखिर वाला चलऽ में अविकारी चिह्न लगवला बिना ऊ भाव ना आ पाई जवन आवे के चाहीं.

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