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अंगरेजी में ए, हिंदी में ए, ऐ, न आ व, बाकिर भोजपुरी में आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, क, त, द, ध, न, प, ल, स आ ह. बात वर्णमाला के नइखे होखत. बात होखत बा शब्दन के. व्याकरण में पढ़ावल जाला कि ध्वनि से अक्षर बनेला, अक्षर से शब्द, शब्द से वाक्य. बाकिर कुछ अक्षर अपने में शब्द बन जालें. अंगरेजी वर्णमाला में ई ताकत सिर्फ ए में आइल जवना के अकेले शब्द का रूप में भरपूर इस्तेमाल होला. हिन्दी में खोजे चलनी त ए, ऐ, न आ अपवाद स्वरुप व के उपयोग स्वतंत्र शब्द का रुप में मिलल. भोजपुरी में अइसन शब्दन के भरमार बा. एवम आ और का जगहा आ, इस का जगहा इ, यही भा इहे जतावे खातिर ई, उस का जगहा उ, किसी खास वही खातिर ऊ, पुकारे में ए आ ऐ, दू गो शब्द के संबंध, जएसे कि राम के साइकिल खातिर राम क साइकिल, जतावत क, कर के बदले क, तो का बदला त, दो का बदले द, धर के जगहा ध, ना भा नकारे खातिर न, पर का जगहा प, लो खातिर ल, बहुत लोग कुछ करे त ओकरा के जतावत कहले स वाला स (हालांकि सँ आ सं के इस्तेमाल अधिका सही रही), आ आखिर में है का बदले ह के इस्तेमाल भोजपुरी में खूब होखेला.

बात भोजपुरी के निकलल त इहो बतावल जरूरी लागता कि भोजपुरी बोले में जतना सहज लागेले लिखे आ पढ़े में ओतने दुश्वार होले. एके शब्द के कई तरह से उचारल जा सकेला आ हर उचरला में ओकर मतलब बदल सकेला. शायद इहे कारण बा कि भोजपुरी में दूअर्थी बोल खुबे सुने के मिल जाला. अब ई भासा के ताकतो भइल आ कमजोरिओ. स्कूली पढ़ाई लिखाई के माध्यम हिंदी रहला का चलते भोजपुरी के एह खासियत के अनदेखी हो गइल आ चूंकि शिक्षित लोग हिंदी भाषी होत चल गइल त भोजपुरी अशिक्षित आ सामान्य जनता के भासा बन के रहि गइल. बाप के नाम साग-पात बेटा के नाम परोरा के चरितार्थ करत हमनी का अपने भासा के अनदेखी क दिहनी सँ. माई क बात असहज करे लागल आ सास आदरणीय बन गइली. एहिजा विरोध सास के आदर से नइखे विरोध माई के अनदेखी से बा. भोजपुरी का माटी में जनमल, खेलल पोसाइल लोग पढ़ला का बाद हिंदी का ससुरारी के हो के रहि गइल बा. भोजपुरी के सहजता ओह लोगन के गँवारूपन लागे लागल बा. आ एही चलते ओह लोग के हिंदी के फूला लउके भा ना लउके भोजपुरी के माढ़ा गड़े लागेला.

भोजपुरी के एगो अउर खासियत बा जवना प पता ना काहे सेकुलर लोग के धेयान ना जाला. हिंदी का मुकाबले भोजपुरी में उर्दू शब्दन के इस्तेमाल जतना सहजता से आ बढ़-चढ़ के होला ऊ मान करे जोग आ गान करे जोग बा. अगर देखल जाव त भोजपुरी के सेकुलर भासा कहल गलत ना कहाई. एह नजरिया से देखल जाव त हिंदी हिंदुत्व के भासा लागे लागी. हिंदी विद्वानन के जोर रहेला कि संस्कृत से निष्ठा बनल रहो. एह फेर में हिंदी असहज होखत होखे त हो जाव बाकिर ओकरा के बाजारू नइखे बने देबे के. अलग बाति बा कि हिंदी बाजारू भासा बने भा मत बने बाजार के भासा त बनही लागल बिया आ गँवे-गँवे दुनियो ओकर मान राखे लागल बिया. नयका पीएम का बाद त हिंदी के भाव अउरी बढ़ गइल बा आ एकर हम स्वागत करत बानी. बाकिर हम चाहब कि भोजपुरिया लोग अपनो भासा के मान सम्मान के धेयान राखो, ओकरा गँवारूपन का चलते ओकर अनदेखी मत करे. एगो गीत के लाइन धेयान में आवत बा कि पढ़ीह लिखीह कवनो भासा, बतियइह भोजपुरी में!

आ चलत-चलत एकाध लाइन अविकारी चिह्न का बारे में. पढ़ आ पढ़ऽ के अन्तर, चल आ चलऽ के अन्तर जतावे खातिर ऽ चिह्न के इस्तेमाल जरूर होखे बाकिर हर जगहा बात-बेबात एकर इस्तेमाल कइला के जरूरत ना होखे के चाहीं. एकवर्णी शब्दन, जइसे कि क, त, ध, ल, ह वगैरह, का साथे अविकारी चिह्न के कवनो खास जरूरत ना होखे आ एकरा से भरसक बचे के चाहीं. ना अति बरखा ना अति धूप, ना अति बोलता ना अति चूप. एहिजा चुप लिखल गलत हो जाई हालांकि मतलब उहे रही.

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