फार, फारल भा फरला से लगवले फरिअवता भा फरिआवल के चरचा : बतकुच्चन – 197

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फार, फारल भा फरला से लगवले फरिअवता भा फरिआवल के चरचा करे चलनी त नीर-क्षीर विवेक के बात धेयान में आ गइल. कहल जाला कि हंस नाम के पक्षी में अतना ज्ञान होला कि ऊ पानी आ दूध के अलग क के दूध त पी बाकिर पानी छोड़ देला. एही से कहल जाला कि हंस में नीर-क्षीर विवेक होला. अब एकरे के अउरी फरिया के कहे के कोशिश करीं त कहल जा सकेला नीमन-बाउर, हित-अनहित, साँच-झूठ के जान चीन्ह के बढियका के सकारल आ खरबका के दुतकारे वाला विवेक नीर-क्षीर विवेक होला. आ आम आदमी जब दूध आ पानी के अलग करे चली त ओकरा दूध के फारे के पड़ी आ तबे ओहमें के पानी अलग हो जाई आ छेना अलग. दूध के खउला के पानी सूखा के खोवा बनावल जाला बाकिर खोवा में कुछ ना कुछ पानी बचिए जाई. एकदम अलग करे चलब त ऊ जर जाई आ खोवा ना रही. त दूध पानी के अलग करे खातिर ओकरा के फारले सही होला.

फार शब्द ओह साधनो खातिर इस्तेमाल होला जवन बहुते धारदार होला आ हर भा हल का नोक पर लगा के धरती फारे ला इस्तेमाल होला. फारे खातिर कागज आ कपड़ो फारल जाला बाकिर ऊ नीर क्षीर विवेक ना कहा सके काहे कि जमीन, कागज, भा कपड़ा फारलो का बाद दुनू ओर धरती, कागज, भा कपड़े रहेला कुछ अउर ना हो जाव. एह तरह से फारलो दू तरह के हो गइल. एगो में फरलो का बाद उहे रह जाला जबकि दुसरका में दू गो अलग अलग चीझु अलगा हो के निकलेला. फारल वाला फरला आ फरल वाला फरला में फरक ई हो जाला कि एगो फाड़ेला, दोसरका फल देला. कहे वाला इहो कह सकेले कि फाड़लो से फल निकलेला आ फरलो पर. अब एहिजा फरक ई हो जाला कि एगो परिणाम वाला फल होला, दुसरका खाए वाला फल.

एह फरला आ फरला में अंगरेजी वाला फर्लो के घुसावल नीक ना कहाई बाकिर उहो फर्लो ओकरे के मिलेला जेकर चहुँप तगड़ा होखो. बड़ बाप महतारी के कपूत बेटा जब जेल से बहरी आवेला त ऊ फर्लो पर आवेला जबकि आम आदमी के बेटा होखी त ओकरा परोल पर आवे के पड़ी. आ जब फर्लो आ परोल के चरचा करिए दिहनी त जान जाईं कि परोल पर बितावल दिन सजा के अवधि से घटावल ना जाव जबकि फर्लो पर बितावल दिन ओकरा सजाय में से घटा दीहल जाला. मदर इण्डिया वाली मदर के बेटा के तुलना कवनो इण्डियन मदर के बेटा से ना नू कइल जा सके! अब एह पर कानून के जानकार मथफोर करसु, हमरा बेंवत के बहरी बा ई. हम त लवटत बानी फरिआवे का तरफ.

फरिआवल भा फरिअवतो दू तरह के होला. एगो में दू गो फरीक अपने में फरिआ लेले कि चलऽ आजु मामिला फरिआइए लीहल जाव. जबकि दोसरका में केहु तीसर एह बात के फरिअवता करेला कि विवाद भा झगड़ा कइसे सलटावल जा सकेला. पहिलका में दुनू पक्ष एक दोसरा के कपार फोड़ सकेले जबकि दुसरका में दुनू फरीक मिल के ओह तिसरइत के फोर देसु त फोर देसु बाकिर आम तौर पर फरिअवता में फोरउवल ना होखे. कुछ लोग के खासियत होला कि अपना महान होखे के फायदा उठा के कुछ कह देलें, फरिआवसु ना कि उनुका कहला के असल मकसद का रहल आ लोग बा जे कि उनका कहला के लेके फोरउवल करे लागेलें. अब एह बात पर हम कवनो पुरनिया से मार्गदर्शन पावल चाहब बाकिर हमार मुसीबत ई बा कि हमरा लगे कवनो मार्गदर्शक मंडले नइखे त हमरा ला एकरा के फरिआई के?

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