शब्द का बहाने बतकुच्चन होला. आ शब्द एगो भा अधिका ध्वनियन के अइसन समूह ह जवना के कवनो मतलब निकलत होखो. मतलब नइखे निकलत त ऊ शब्द कहाइये ना सके. जइसे कि गिलगिलइला के शब्द ना कहल जा सके. अलग बाति बा कि एह काम के बतावे खातिर गिलिगिलाइल भा गिलिगिलाहट के शब्द जरूर मानल जा सकेला. गिलगिलइला से निकलल ध्वनि के ना. आजुकाल्ह कई राज्यन में नेता लोग अइसने गिलगिलाहट में लागल बा. ओह लोग के कई बात के मतलब बूझल आम आदमी खातिर मुश्किल जरुर बा बाकिर ओह लोग का मुँह से निकले वाला ध्वनि होला त शब्दे. अब ई त होखी ना कि हमरा मतलब नइखे बूझात त हम ओह ध्वनि भा ध्वनि समूह के शब्द माने से इंकार कर दीं. त फेर बाति ई सामने आइल कि जवना के मतलब बहुते लोग समुझ सके ओकरा के शब्द कहल जा सकेला. हर भाषा में अलग अलग शब्द पावल जाला. बहुते शब्द के समान मतलब वाला शब्द दोसरा भाषा में ना मिले. एक से एक धनी सक्षम भाषा में हर मतलब खातिर शब्द ना मिले. एह चलते अंगरेजीओ जइसन भाषा जम के दोसरा भाषा के शब्दन के आत्मसात करत रहेले. अंगरेजी एहिसे बड़हन बन सकल कि ओकरा में दोसरा भाषा के शब्दन के पचावे के, आपन बना लेबे के बेंवत मौजूद बा. ठीक ओही तरह जइसे नेता लोग के बेंवत होला कि जनता के संपत्ति, राष्ट्र के संपत्ति के आपन बनावत जाले, पचावत जाले, आत्मसात करत जाले. भोजपुरी इलाका में व्हेल मछली ना मिले त हमनी का लगे ह्वेल खातिर कवनो शब्द नइखे आ ह्वेले से काम चलावे के पड़ी. ठीक वइसहीं जइसे कि गरई भा पोठिया मछरी खातिर दोसरा भाषा में सहज शब्द ना मिली. एहसे ई बाति सामने आइल कि भाषा ओह समाज के परिवेश, माहौल के आइना होला. जवन हमरा लगे हइये नइखे ओकरा के हम दोसरा के दे कइसे सकीले, देखा कइसे सकीले. सोचत होखब सभे कि आजु हम ई कवन पचरा ले बइठल बानी. असल में एक दिन पढ़त घरी धेयान में आइल कि जवन पाजिटिव थिंकिंग वाला पाजिटिव शब्द बा ओकर सही भोजपुरी का होई ? धनात्मक चिंतन, गुणात्मक चिंतन भा अइसने कवनो दोसरा शब्द से ऊ सही भाव सामने ना आ पावे. तब का हमनी का लगे पाजिटिव थिंकिंग के सोचे ना होखे ? उबारू सोच, आगा ले जाये वाला सोच खातिर कवनो शब्द काहे नइखे, भा बावे बाकिर हमरा मालूम नइखे. अगुआही सोच, अगताही सोच का ऊ मतलब पूरा कर सकेले ? कुछ त रउरो सभे बोलीं.

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