रोए के रहनी तले अँखिए खोदा गइल. लिखब त उहे जवन लिखे के रहल. बाकिर बज्जर पड़ो एह ग्रिड पर जवना चलते पिछला दिने आधा हिन्दुस्तान अन्हार हो गइल रहुवे. पावर ग्रिड के कहना बा कि राज्यन का ग्रीड का चलते ग्रिड फेल कर गइल. जबकि राज्य एह अछरंग के नकारत बाड़ें. जे लोग ओह दिन के पावर कट झेलल ऊ हिन्दुस्तान के आधा आबादी के बरोबर रहलें. बहुते लोग कहत रहल कि बज्जर पड़ो एह सरकार पर बाकिर लोग के एह बजरला पर सरकारी गोल के कहनुआ के कहना रहल कि, ना, देश में कवनो बिजली संकट नइखे. हँ कुछ जगहा के बिजली गुल हो गइल बा. अब बिजली के बात से अलगा हटत बचकुच्चन का मुद्दा पर आवत बानी. पिछला बेर बरजे आ बरजला के बात भइल रहे. बाकिर बजरल के ना. बाकिर पिछला दिने जवना लोग पर बिजली के आफत बजरल, हमहु ओही में रहलीं, ऊ कवनो बज्जर गिरला से कम ना रहल. दधीचि का तरह आपन हड्ड़ी गला के देवतन ला वज्र जइसन हड्डी देबे के कोशिश करे वाला के केहु देखे सुने बतिआवे वाला नइखे मिलत. मत मिलो. सभे पर बजरत बा हमरो पर बजरी. बाकिर आजु त हमरा बतकुच्चन करे बा. पहिले सोचले रहीं कि बरजला, बजरला आ बज्जर पर बात करब. बाकिर बिजली गुल सगरी बात के दोसर संदर्भ दे दिहलसि, एह बीच एगो नया शब्द बिना कुछ सोचले बन गइल, कहनुआ. पता ना जब पहिला बेर पढ़नी सभे त एह पर धेयान पड़ल कि ना. से अब दोहरावत बानी. ऊ शब्द रहल कहनुआ आ ऊ कहनुआ कवनो अइसन वइसन ना सरकारी गोल के कहनुआ. कहनुआ भोजपुरी के ठेंठ शब्द होखी प्रवक्ता का जगहा आ पार्टी खातिर सही भोजपुरी शब्द रही गोल. ई गोल फुटबाल भा हॉकी के गोल वाला गोल ना होके दल, जत्था, समुह, गिरोह, जरोह जइसन गोल ह. गोल ओह समुह के कहल जाला जवन कवनो खास बात, चीझु भा जगहा के चारो ओर गोल बना के खड़ा होखे. राजनीतिक पार्टियन खातिर गोल शब्द सबले सही होखी, दल अनुशासित होला, जत्था एक पर एक कई गो चलेला, गिरोह चोर डाकू गिरहकटन के होला आ गोल केहु के हो सकेला. एह गोल से गिरोह वाला भनक ना मिले. हो सकेला कि अन्ना टीम के एह पर आपत्ति होखो कि देश के सगरी दल गोल कम गिरोह बेसी हो गइल बाड़ें बाकिर हमरा राजनीति त करे के नइखे एहिजा. कबीरा खड़ा बाजार में सबकी पूछे खैर, ना काहु से दोसती ना काहु से बैर. बाकिर देखीं ना बात फेरु बहक गइल. संस्कृत वर्जना से उपजल शब्द बरजल आ वज्रपात से निकलल बज्जर पड़ल. बजरल एही बज्जर से जुड़ल बा. आदमी केहु के बरजेला आ केहु पर बजरेला. बात के देवता के बात से पूजल जाला आ लात के देवता के लात से. जे बरजला से मान गइल ओकरा पर बजरे के जरूरत ना पड़े आ जे बरजला से ना माने ओकरा पर बजरल जरूरी हो जाला. बाकिर बज्जर जइसन शब्द बजरी आ बाजरा में झलकत मिल जाता. बजरी कहल जाला ओह चना के जवना के बहिन अपना भाई के खिआवेलीं सँ ओकरा के वज्र जइसन कठोर बनावे खातिर. ऊ चनवो बजर होखेला से अलगा बात बा बाकिर हर चना के बजरी ना कहल जाव. बजरी का दिने, भईयादूज का दिने, बहिन अपना भाईयन के सरापेली सँ आ फेर ओही सरपला के बाद ऊ बजरी गुड़ भा मिठाई संगे अपना भाई के खिआवेलीं सँ ओकर मन अतना वज्र हो जाव कि बहिन के छोट मोट गलती के बरदाश्त कर सके. बाजरा भोजपुरी इलाका में ना उपजे से ओकरा के छोड़ दिहल जाव. काहे कि जवन चीझु होखबे ना करे ओकरा खातिर शब्द कहाँ से आई. अगिला बेर फेर मिलहीं के बा.

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