मैंने कहा. हमने कहा. तुमने कहा, उसने कहा, राम ने कहा.

अरे भाई का कहा आ काहे कहा ? आ आजु आप हिन्दी काहे छाँटे लगनी ?

सवाल जायज बा. हमरा ई सब कहला का पाछा के मकसद बा भोजपुरी के खास सुभाव का बारे में बतावे के. अगर इहे सब भोजपुरी में कहल जाव त का कहाई, पढ़ीं. हम कहनी. हमनी कहनी. तूं कहलऽ. ऊ कहलसि. राम कहलें. एके गो शब्द के भोजपुरी में कई गो रूप हो गइल. हिन्दी में पढ़ला लिखला का बाद भोजपुरी लिखे बोले चलीं त कई तरह के परेशानी आवेला. भोजपुरी में नाम तक बदल जाला संस्कृत जइसन. हिन्दी में त विभक्ति सूचक शब्द बना लिहल गइल बाकिर भोजपुरी में ना. एहसे कबो कबो रामो कहले, सीतो त इहे कहली जइसन शब्द लिखे में हिन्दी ज्ञान बाधा बन जाले. कुछ लोग समुझेला कि हिन्दी के बिगाड़ के लिख दीं त उहे भोजपुरी हो जाई. जबकि बात अइसन नइखे. भोजपुरी के आपन सुभाव होला. जबले ओह सुभाव का हिसाब से ना लिखब बोलब तबले ऊ भोजपुरी ना हो सके.

एगो अउरी गलती से हमरा आये दिन सामना होत रहेला. ऊ ह “भी” के प्रयोग. हिन्दी के आदत का चलते अकसरहाँ भोजपुरियो में लोग “भी” शब्द के प्रयोग कर देला. जबकि भोजपुरी में “भी” शब्द हईये नइखे, ठीक ओही तरह जइसे कि “मैं” शब्द नइखे. भोजपुरी में “मैं” खातिर हम आ हम खातिर हमनी भा हमहन के प्रयोग होखेला. माई आ भाई का देखा देखी आइल-गइल-कइल-भइल के आईल-गईल-कईल-भईल लिख देला लोग जवन कि गलत ह. भीतर कब भितरिये के बाति बन जाई इहो समुझे के पड़ी. मास्टरनी आ मास्टराइन दू गो अलग अलग औरत के बतावेला. मास्टरनी ऊ औरत जे पढ़ावेले, मास्टर होले आ मास्टराइन ऊ जे मास्टर के पत्नी, मेहरारू होखे. ठीक एही तरह डाक्टरनी आ डाक्टराइन के प्रयोग होला. आजु अतने. बाकी फेर कबो.

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