बतकुच्चन – ९

मैंने कहा. हमने कहा. तुमने कहा, उसने कहा, राम ने कहा.

अरे भाई का कहा आ काहे कहा ? आ आजु आप हिन्दी काहे छाँटे लगनी ?

सवाल जायज बा. हमरा ई सब कहला का पाछा के मकसद बा भोजपुरी के खास सुभाव का बारे में बतावे के. अगर इहे सब भोजपुरी में कहल जाव त का कहाई, पढ़ीं. हम कहनी. हमनी कहनी. तूं कहलऽ. ऊ कहलसि. राम कहलें. एके गो शब्द के भोजपुरी में कई गो रूप हो गइल. हिन्दी में पढ़ला लिखला का बाद भोजपुरी लिखे बोले चलीं त कई तरह के परेशानी आवेला. भोजपुरी में नाम तक बदल जाला संस्कृत जइसन. हिन्दी में त विभक्ति सूचक शब्द बना लिहल गइल बाकिर भोजपुरी में ना. एहसे कबो कबो रामो कहले, सीतो त इहे कहली जइसन शब्द लिखे में हिन्दी ज्ञान बाधा बन जाले. कुछ लोग समुझेला कि हिन्दी के बिगाड़ के लिख दीं त उहे भोजपुरी हो जाई. जबकि बात अइसन नइखे. भोजपुरी के आपन सुभाव होला. जबले ओह सुभाव का हिसाब से ना लिखब बोलब तबले ऊ भोजपुरी ना हो सके.

एगो अउरी गलती से हमरा आये दिन सामना होत रहेला. ऊ ह “भी” के प्रयोग. हिन्दी के आदत का चलते अकसरहाँ भोजपुरियो में लोग “भी” शब्द के प्रयोग कर देला. जबकि भोजपुरी में “भी” शब्द हईये नइखे, ठीक ओही तरह जइसे कि “मैं” शब्द नइखे. भोजपुरी में “मैं” खातिर हम आ हम खातिर हमनी भा हमहन के प्रयोग होखेला. माई आ भाई का देखा देखी आइल-गइल-कइल-भइल के आईल-गईल-कईल-भईल लिख देला लोग जवन कि गलत ह. भीतर कब भितरिये के बाति बन जाई इहो समुझे के पड़ी. मास्टरनी आ मास्टराइन दू गो अलग अलग औरत के बतावेला. मास्टरनी ऊ औरत जे पढ़ावेले, मास्टर होले आ मास्टराइन ऊ जे मास्टर के पत्नी, मेहरारू होखे. ठीक एही तरह डाक्टरनी आ डाक्टराइन के प्रयोग होला. आजु अतने. बाकी फेर कबो.

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1 Comment

  1. नमस्कार,
    बहुते अच्छा लागल..पर एगो चीज स्पष्ट करे बा..उ हमरा लागता.कवनो जरूरी नइखे की जवन हमरा लागो उ रउआँ सब के भी लागो..
    मास्टरनी अउर डाक्टरनी त ठीक बा मतलब महिला मास्टर अउर महिला डाक्टर पर
    मास्टराइन अउर डाक्टराइन अनेकार्थी बा…इहाँ मास्टराइन अउर डाक्टराइन के दुगो अरथ बा….
    मास्टराइन—-1. महिला मास्टर मलतब उ अउरत जवने पढ़ावे….जइसे–अरे भाई राम के का पूछे के उ भले घरे रहि के खेती-बारी करेने पर उनकर मेहरारू त मास्टराइन (मास्टरनी) ह…जूनियर हाइस्कूल में पढ़ावेले.(mistress—a woman schoolteacher)…2. मास्टर (अध्यापक) के मेहरारू. (teacher’s wife)
    ………………………….इ ही आधार पर डाक्टराइन के दुगो अर्थ बा…एगो डाक्टरी करेवाली मतलब महिला डाक्टर अउर दूसरका डाक्टर के मेहरारू…बंबई से हमार डाक्टराइन काकी आइल बाड़ी..(इहाँ हम आप सबके बता दीं की हमार डाक्टराइन काकी स्कूले के मुँहवों नइखी देखले.)

    चलीं जब बात बिना बात के इहाँ ले बढ़ि गइल त ए बात के इहँवे ले रोकल ठीक नइके ए बात के तनि अउरी आगे ले बढ़ा देहल जाव——

    हम बात करतानी मास्टर अउर डाक्टर के….इ दुनु सबद भी अनेकार्थी (polysemy, lexical ambiguity) बा….अब पूछीं उ कइसी…अरे भाई अगर हम कहतानि की ए विस्वविद्यालय में लगभग 300 मास्टर बाने..त इहाँ मास्टर, मास्टर जाति के बोध करावता न कि खाली पुरुष मास्टर के, कहे के मतलब इ बा की ए में पुरुष-महिला दुनु जाने सामिल बाने अगर केहू उभयलिंगी भी मास्टर बा…अरे भाई थपरिया बजावेवाली त उहो मास्टरे कहाई…मतलब जे भी पढ़ा रहल बा उ चाहें महिला ह चाहें पुरुष उ सब मास्टर वर्ग में आई अउर मास्टरे कहाई…इ त हो गइल पहिला सेंस..अउर दूसरका सेंस (अर्थ) पुरुस मास्टर यानि उ पुरुष जे पढ़ावे……मास्टर अउर भी सेंस (अर्थ) में परयोग होला…पर हम जवन कहल चाहत रहनी हँ उ कही देहनी अब अउर गहराई में ना जाइब अउर अपनी बात के इहवें खतम करबि..इहे हाल डाक्टर चाहें अउर ए तरह के सब्दन के बा…काहें सोंचे लगनि….एतना दिमाग पर जोर मति दीं…चलि दु-तीनगो अउर उदाहरन दे दे तानी ताकि रअरी दिमागे पर ढेर जोर मति पड़ो….पिल्ला भोंकताने कुलि (अरे महराजजी, ए में पिल्ला अउर पिल्ली दुनु सामिल बाने सन…यानि इहाँ पिल्ला, पिल्ला जाति के (कुत्ता समष्टि) बोध करावता…पर जब रउआँ कहबि की राम एगो पिल्ला अउर एगो पिल्ली पोसले बानें त इहाँ पिल्ला यानि नर पिल्ला….अउर उदाहरन न देत हम अब अउर रुआँ सब के दिमाग ना खाइबि….सादर।)………………एगो बात अउर बता देतानी..मवका मिलते हम रउआँ सब के अनेकार्थी (polysemy) अउर अनेकार्थक (polysemous, polysemantic) से भी परिचय कराइबि…हम जानतानी कि रउआँ सब सोंच रहल बानी की परभाकरजी के बिना बात के बात करे के आदत बा अउर बिना बात के कवनो बात के आगे बढ़ा ले जाने…पर का करीं आदत से मजबूर बानी….जय हिंद।।

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