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कहल आसान होला कि बीत गइल तवन बात गइल बाकिर असल जिनगी में बीतल बात भर जिनिगी चहेटत रहेला. चाहिओ के ओकरा से पीछा छोड़ावल मुश्किल होला. बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय? जस करनी तस भोगहू तापा, नरक जात नर क्यों पछताता.

आजु जब रउरा सभे से बतियावे के मौका मिलल बा त अंगरेजन के नया साल शुरू हो गइल बा. बाकिर अंगरेजन के दीहल छोड़ल अतना कुछ हमनी का अपना लिहले बानी जा कि बहुत कुछ आपने लागे लागल बा. ओही में से अंगरेजी भासा आ अंगरेजी कैलेंडर बाड़ी स. देश आजाद भइल त संविधान बनावे वाला देश खातिर आपन कैलेंडरो चुनलें. कुछेक साल ले त आकाशवाणी ओह तारीख के जनमानस में बनवले रखलसि. आज शक संवत फलां के फलां महीना की फलां तिथि तदनुसार फलां महीना फलां साल वगैरह. सरकारी गजट वगैरह में एकर बाकायदा इस्तेमाल होखल करे. बाकिर ओह शक संवत के माने वाला केहू ना रहल. विक्रम संवत मनला में खतरा रहे कि हिन्दू कैलेंडर चलावे के आरोप लाग जाई आ हमनी के सरकार हर ओह काम से परहेज करेले जवना से कवनो दूरो दराज के नाता हिन्दु धर्म से निकल सके. समय का प्रवाह में आकाशवाणी आकाशे में रह गइल आ आम जनता खातिर तरह तरह के टीवी चैनल खबर लेबे देबे के पहिला सहारा बन गइले स. सगरी ना त अधिकतर खबरिया चैनलो हिंदु धर्म से वइसने परहेज करेले जइसन सरकार आ करीब करीब सगरी राजनीतिक गोलो करेले. संस्कृत पढ़ल पढ़ावल जल्दिए गुजरल जमाना के बात होखे वाला बा. अरबी फारसी खातिर जतना सरकारी सहायता समर्थन मिलेला ततना संस्कृत खातिर ना मिले.

धेयान देब त पाएब कि हर हिंदु परब त्योहार के नीचा देखावल फैशन हो गइल बा. फगुआ का बेरा रंग से होखेवाला नुकसान आ पानी के बरबादी के चरचा होखे लागेला, दियरी बाती का समय बम पटाखा से होखे वाला प्रदूषण के,करवा चौथ पर मेहरारूवन पर होखे वाला अत्याचार के कि मरदन खातिर त मेहरारूवन के परब बना दीहल गइल बाकिर मेहरारूवन ला कवनो परब मरद ना करसु. अब ओह लोग के के समुझावे आ कइसे समुझावे कि आम मरद त बिआह का बाद से मरे का दिन ले हमेशा अपना मेहरारू ला मरत जीयत रहेला.

अब रउरो कहब कि हँसुआ का बिआह में हम खुरपी के गीत काहे उठा दिहनी त हम कहब कि इहे त मौका बन गइल बा जब हमनी का नया साल ला नया नया योजना बनाइले, नया फैसला करीले, अपना रहन सहन, खाए पीए में बदलाव करे के फैसला करीले वगैरह वगैरह. अब ई अलग बाति बा कि नया साल का मौका पर लीहल फैसला कतना दिन ले चलेला. मुश्किल से दू तीन हफ्ता बीतत बीतत लोग पुरनका ढर्रा पर लवटे लागेला. रउरो लवटब. आजु ना त काल्हु. त बेमतलब के मुबारकबाद दिहला का बदले सोचली कि काहे ना आजु कुछ अइसने चरचा क लीहल जाव. साल २००२ के दंगा पर नरेन्द्र मोदी के अफसोस सुनल जाव, भठियरपन पर राहुल गाँधी के़ विचार भा बेटो के किरिया खा के पलटि जाए वाला झाड़ूवाल के भाषण. तुष्टिकरण के राजनीति करेवाला मुलायम के पलटी मार कठ करेज बनल त अबहीं एकदमे ताजा बा. अब इहो लोग कहे कि बीत गइल तवन बाति गइल त का साचहूं माने लायक होखी? हम त बस इहे कहब कि जस करनी तस भोगहू तापा. जइसन करब वइसने भुगतबऽ. नरक जात नर क्यो् पछताता? एहसे जतना हो सके ओतना कथनी ना करनी सुधारे के काम कइल जाव.

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