अभयकृष्ण त्रिपाठी

अंग्रेजी के हुकुमत पर कलम चलावत बानी रेड,
माई हो गइली ममी बाबूजी के करत बानी डेड।।

अतना कइला पर भी अबही ले हम बैकवर्ड बानी,
ठेकेदारन के कर दिहला बिना फारवर्ड मत जानी,
अपना बचवन के विदेश भेज सबके गरियावत बा.
कुकुरन के गले लगा माई बाबू पर नरियावत बा,
बिरादरी के गले लगा बकियन के फोड़त बा हेड,
अंग्रेजी के हुकुमत पर….।।

पइसा लेके विदेशीयन के गलबहियाँ करावत बा,
सच्चा नागरिकन के देश के दुश्मन बतावत बा,
विदेश में भारतीय पर हमला में करत बा फिकर,
देशी लोगन के जुतिया के नइखे करत जिकर,
पवना जनता के गरिया के बनत बा इंडियन मेड,
अंग्रेजी के हुकुमत पर….।।

अंग्रेजी के हुकुमत पर कलम चलावत बानी रेड,
माई हो गइली ममी बाबूजी के करत बानी डेड।।


अभय रचनावलि

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