– ओ.पी. अमृतांशु

पर घर के आसरा कइली मतारी, आइल पतोहिया भारी रे.
रोएली लोरवा ढारी मतारी, रोएली लोरवा ढारी रे.

नव महीना दरदिया सहली ,बबुआ के जनमवली 
देवता-पितर पूजली, शीतला माई के गोद भरवली
नजर-गुजर ना लागो, केतना मरीचा दिहली जारी रे,
रोएली लोरवा ढारी मतारी, रोएली लोरवा ढारी रे.

छ्छ्ने छुधवा माई के, पतोहिया अफरे खाई के,
दुधे-मलाई में डूबल बा, नकिया  अनका-जाई के.
टुकुर -टुकुर ताकेला अँखिया, कइसन बा लचारी रे
रोएली लोरवा ढारी मतारी, रोएली लोरवा ढारी रे.

रोपनी-सोहनी कइली, बबुआ के खूब पढ़वली,
ममता के गोदिया में, एगो सुन्दर फूल खिलवली.
मुरुझाइल फुलवरिया, फुलवा लोढ़लस बे-विचारी रे.
रोएली लोरवा ढारी मतारी, रोएली लोरवा ढारी रे.

कलपत जियरा, हहरत हियरा, डहकत छने-छने रोंवा
छछनत हाय  परनवा बाटे, कइली कवन कसूरवा.
हाय रे रामजी,  हद के लीला तहरो बाटे न्यारी रे.  
रोएली लोरवा ढारी मतारी, रोएली लोरवा ढारी रे.

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