– ओमप्रकाश अमृतांशु

omprakash_amritanshu
अखड़ेड़े लिहबू का जनवा हो ?
ऊसिनाइल परानवा.

लूकवा लूकारी लेई धावे अंगार के,
झउंसाइल मुहंवा कुदरती सिंगार के,
पपड़िया गइल तालवा-पोखरवा हो,
ऊसिनाइल परानवा.

हिरणा पियासा ऐने-ओने धावे,
कोइली-पपिहा के जीव छछनावे,
खदकत पसेनवा में तनवा हो,
ऊसिनाइल परानवा.

घामवा के आंचवा में जरि गइलें चाम हो,
बग-फुलवरिया के मिटऽता निशान हो,
तड़पे गोदी के नन्हकवा हो,
ऊसिनाइल परानवा.

आवऽ बदरवा के बरखा हो रानी,
झम-झम अंगनवा में बरिसावऽ पानी,
खिल जाई उजड़त चमनवा हो,
ऊसिनाइल परानवा.

अखड़ेड़े लिहबू का जानवा हो ?
ऊसिनाइल परानवा.

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3 Comments

  1. जून के तपन के सार्थक आ वास्तविक चित्र के प्रस्तुति खातिर कोटिशः बधाई। भाई अमृतांशु जी, राउर कवनो जोड़ नइखे। ई दृष्टि स्पष्ट करता कि जब एगो चित्रकार आ कलमकार मिली त अइसने चमत्कार सामने आई। हार्दिक बधाई।

  2. राउर गीत बहुत सुन्दर लागल , सहिये में जान अब उसिना रहल बा ….त्राहिमाम त्राहिमाम हो रहल बा . अच्छा रचना खातीर बधाई .
    .
    राज कुमार अनुरागी
    संपादक -हेलो भोजपुरी
    (राष्ट्रीय मासिक पत्रिका)
    7838398788

  3. सही में प्राण ऊबल गइल बा. एकदम सटिक गीत…..
    धन्यवाद

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