– गुरविन्दर सिंह

राह घाट लउके ना, छपलस अन्हरिया
झिमिर झिमिर बरसेले करिया बदरिया!

खेतवा में मकई के गाड़ल मचानी
सूतल बा जाके बलमु अभिमानी
निनिया उड़ावेले चिन्ता फिकिरिया!

डर लागे रतिया में सियरा हुँड़रवा
ओहू ले ऊपर मुदइयन के डरवा
मेघवा के गड़गड़ में चिहुँके बिजुरिया !

कहे बदे हीत मीत टोला परोसा
एह जुग में केकर बा कवनो भरोसा
बेरा प फेरेला लोगवा नजरिया !
झिमिर झिमिर बरसेले करिया बदरिया !!

 16 total views,  3 views today

By Editor

%d bloggers like this: