कइसे कहीं ए भइया, कि फगुवा आवऽता

– तारकेश्वर राय

देख ए बाबू, सुनऽ ए भाई देशवा हमार जरऽता ।
कहीं बस, कहीं कार, केहू खुनसे में बरऽता ।।
सद्बुद्धि छोड़ छाड़ के, मनई धावऽता ।
कइसे कहीं ए भइया, कि फगुवा आवऽता

कुछ खुरचलियन के फितरत देखीं ।
समाज के टुकड़न में, बटत छीटात देखीं ।।
बुढ़वा, नयका सभे जइसे काटे धावऽता ।
कइसे कहीं ए भइया, कि फगुवा आवऽता

इतिहास के बचावे खातिर, बरतमान के जरावऽता ।
उलटे बहकाय के, अपने में मेरावऽता ।।
संवेदना, सदाचार, भाईचारा, कुलिहे मेटावऽता ।
कइसे कहीं ए भइया, कि फगुवा आवऽता

जाने न इतिहास, ओकरे ढेर फिकिर ।
आपन राजनीती बदे, करे लगले जिकिर ।।
जियत माई सोहाते नइखे, रानी खातिर धावऽता ।।
कइसे कहीं ए भइया, कि फगुवा आवऽता

बिधना के देहल, तोहरा बुद्धि बिवेक बा ।
देश, संविधान बिना, कहाँ कहीं ठेह बा ।।
मान मनावे बदे तोड़ले फुकल मन भावऽता ।
कइसे कहीं ए भइया, कि फगुवा आवऽता


तारकेश्वर राय
ग्राम + पोस्ट : सोनहरियाँ, भुवालचक
जिला : गाजीपुर, उत्तरप्रदेश

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