– नूरैन अंसारी

मत मजहब के मापदंड बनायीं आदमी के पहचान के.
ना त बहुत बड़ा अपमान होई गीता अउर कुरान के.

प्रेम अउर भाईचारा त हर एक धरम के सार ह.
इ जात-पात अउर उंच-नीच के बहुत बड़ा उपचार ह.
अपना देश के सभ्यता-संस्कृती इहे मूल आधार ह.
मत ठेस पहुंचे दी तनको सा भी राष्ट्र के सम्मान के.
ना त बहुत बड़ा अपमान होई गीता अउर कुरान के.

सबकर दाता एके हउवन,सब केहू उनकर संतान ह.
सगरी रिश्ता नाता में इंसानियत ही परधान ह.
सभ्य समाज में घृणा के नाही कौनो स्थान ह .
मत तौली कृत्रिम तुला में कबो बिधि के बिधान के.
ना त बहुत बड़ा अपमान होई गीता अउर कुरान के.


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