keshav-mohan-pandey

– केशव मोहन पाण्डेय

1. गीत

महुआ मन महँकावे,
पपीहा गीत सुनावे,
भौंरा रोजो आवे लागल अंगनवा में।
कवन टोना कइलू अपना नयनवा से।।

पुरुवा गावे लाचारी,
चिहुके अमवा के बारी,
बेरा बढ़-बढ़ के बोले,
मन एने-ओने डोले,
सिहरे सगरो सिवनवा शरमवा से।।

अचके बढ़ जाला चाल,
सपना सजेला बेहाल,
सभे करे अब ठिठोली,
कोइलर बोले ले कुबोली,
हियरा हरषे ला जइसे फगुनवा में।।

खाली चाहीं ना सिंगार,
साथे चाहीं संस्कार,
प्रेम पूजा के थाल,
बाकी सब माया-जाल,
लोग कहे चाहें कुछू जहनवा में।।


2- गीत

हरदम नेहिया के बाण फेंकल करs।
चाहें कवनो नज़रिया से देखल करs।।

साँस तड़पे लागल,
आस जागे लागल ,
प्रीत में गोली से
लोग दागे लागल।

आस दिल के पुराव, करीब आ के तू,
हमके रोकल क र, राह छेंकल करs।।

रात होखे त का,
केहू टोके त का,
तहके चाहत रहेब
देबू धोखे त का।

सगरो चिंता मरे, फिकिर सब छूटे,
खाली तहके सोचीं, अइसे बेकल करs।।

बैर भूले सभे,
मन-झूले सभे,
प्यार ई देख के
फले-फूले सभे।

आदर सब में रहे, केहू कुछ न कहे,
काम अइसन करs, भले एकल करs।।


तमकुही रोड, सेवरही, कुशीनगर, उ. प्र.
संपर्क – kmpandey76@gmail.com

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