गीत

Ram Raksha Mishra Vimal

– रामरक्षा मिश्र विमल

जे रोअवला के खुशिया मनाई
केहू ओकरा के का समुझाई ?

लोर रोकले रोकाला ना कतहीं
कहीं पूड़ी आ पूआ छनाला
कहीं मरघट में बदलेले बगिया
कहीं पाटी में बोतल खोलाला
जे जहरिये में जिनिगी के पाई
केहू ओकरा के का समुझाई ?

नेह के कइसे सीढ़ी चढ़ी ऊ
जेकरा मन में बा नफरत के काई
जेकरा मन में बा जंगल समाइल
कइसे अदिमी के भाषा सिखाईं
सोचिके आवे मन में रोवाई
केहू ओकरा के का समुझाई ?

खून के देखि अँखिया लोराले
लोर से लोर जनमेला सभमें
आदमीयत के पीछे इहे बा
जहाँ करूना हजार बार जनमे
कइसे अदिमी के अदिमी बनाईं ?
केहू ओकरा के का समुझाई ?


अँजोरिया पर विमल जी के पुरान रचना

संपर्क ‐
मो. 91+9831649817 email : ramraksha.mishra@yahoo.com

3 Comments

  1. माननीय विमल जी,
    प्रणाम|
    “जे रोअवला के खुशिया मनाई
    केहू ओकरा के का समुझाई ?” दिल के छू गइल|सरल भाषा में गंभीर बात ए कविता के जान बा|आतंकवादी भाई बहिन लोग के आ ओह लोगन के मदद करेवाला लोगन के भी ई बात जरूर समझे के चाहीं|
    राउर
    पथिक भोजपुरी

  2. बलिया के धरती पर उगले वीर जवान
    रात दिन काम करे इहवां के किसान
    देशवा खातिर दे देला सब जान
    कहे के त बलिया हउवे बागी
    एही रे धरतिया पर दाग नाही लागी
    मंगल पाण्डे, चित्तूपाण्डे
    हउवन देश के लाल
    रहले चन्द्रशेखर बलिया के शान

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