– डॉ.कमल किशोर सिंह

चिकित्सक के चइता

रामा कहेलें कन्हैया
सुनहो प्यारी राधिका हो रामा
हमरा के –
मक्खन अब ना खियाव हो रामा
हमरा के ——

रामा खाई के मक्खनवा
बढ़वनी वजनवा हो रामा ,
रक्त-चाप –
रक्त- चाप करे परेसनवा हो रामा
रक्त -चाप ——-

रामा बाबा श्री गणेश
ईहे बा आदेश हो रामा –
‘हमरा के –
लड्डू केहू ना चढ़ावे’ हो रामा
हमरा के ——–

रामा मोदक सेवनवा से
बढ़ल बदनवा हो रामा ,
मधुमेह ,
मधुमेह धईलस  गरदनवा हो रामा ,
मधुमेह ———-

रामा करब अल्पहरावा ,
कंद,मूल ,फलहरवा हो रामा ,
रोज हम –
घुमब जाई के बहरवा हो रामा
रोज हम —–

रामा सूई -टीका ,योग-भोग ,
उचित अहरवा हो रामा ,
ईहे सभ –
स्वास्थ-सुरक्षा बिचरवा हो रामा
ईहे सभ —


चइता (2)
बहे बड़ी बिमल बयरिया हो रामा,
चल बइठे के बहरिया.
पोर, पोर टूटेला गतरिया हो रामा,
मन लागे ना भितरिया.

रतिया के रमणीय चइत के  चंदनिया,
बाहरे बिछाव बिस्तरिया हो रामा,
सूतऽ तानी के चदरिया.

सांझ सुबह नीक लागे सिहरावन,
आलस जगावे दुपहरिया हो रामा,
चल बइठे के छहरिया.

कोमल किसलय में फुदुके चिरइया,
झाँकेली झरोखा से बहुरिया हो रामा,
जैसे झांपी के नजरिया.

टहनी प आइल टूसवा टिकोरवा,
प्रकृति लागेली लोरकरिया हो रामा,
झूमी गावेली सोहारिया.

लागे सिरगरम दरिया सागरवा,
छपकेली सजल सुंदरिया हो रामा,
चल पानी के किनरिया.


– डॉ.कमल किशोर सिंह, रिवरहेड, न्यू योर्क, अमेरिका

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