– अशोक द्विवेदी


【 एक 】

रसे – रसे महुआ फुलाइल हो रामा
उनुका से कहि दs !
रस देखि भँवरा लोभाइल हो रामा
उनुका से कहि द s !

पुलुई चढ़ल फिरु उतरल फगुनवा
कुहुँकि कुहुँकि ररे बेकल मनवाँ
सपनो में चैन न आइल हो रामा
उनुका से कहि द s !

झुरुकल कइ रात, पुरुबी-बयरिया
टहटह खिलि खिलि झरल अँजोरिया
अँखिया अउर सपनाइल हो रामा
उनुका से कहि द s !

देहिया लेसाइल बिरह-अगिनिया
सेजिया प’ लोटेले सुधि के नगिनिया
रतिया लगेले बिखियाइल हो रामा
उनुका से कहि द s !!

रसे रसे महुआ फुलाइल हो रामा,
उनुका से कहि द s !!


【 दो 】

मन परे पाछिल बतिया
इ बैरी-चइत उसुकावे !
निनिया उड़ावे अधिरतिया
इ बैरी चइत उसुकावे !!

कुरुई भरल रस महुआ क पियले
पुरुआ धसोरे मधुवाइ अनचितले
देहियाँ क’ सइ गो सँसतिया,
इ बैरी चइत उसुकावे !

फगुवो गइल, दिन कटिया के आइल
जोहते जोहत खरिहनवो लिपाइल
उनुका न मिले फुरसतिया
आ बैरी चइत उसुकावे !

मुसवा बिलइया चुहनिया-अँगनवाँ
खरके जे कछु गिरे कहीं बरतनवाँ
धड़केले रहि रहि छतिया,
इ बैरी चइत उसुकावे !

उनुका नोकरिया क सुख बस एतना
सँग कहँ रहिहें देखलको बा सपना
फुटही मिललि किसमतिया ,
आ बैरी चइत उसुकावे !

निनिया उड़ावे अधरतिया
इ बैरी चइत उसुकावे !!

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