– नूरैन अंसारी

जब आपन-आपन लोगवा चिन्हाये लागेला.
तब स्वर्ग जइसन घरवो बटाये लागेला.
जब अबर हो जाला बिश्वास के बरही,
तब तिसरइत के हेंगा टंगाये लागेला.
लोग भुला जाला जब नेकी के नक्सा,
गुलाबो धतूर जइसन बसाये लागेला.
जब घर में हो जाले ईमानदारी मुसमात,
तब दवो-दारु एहसान में गिनाये लागेला.
“नूरैन” प्यार से सुखल रोटीओ लागेला नीमन,
खोबसन से अमरित के बूँदो उगलाये लागेला.

कुछ त कहीं...

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