– नूरैन अंसारी

अबकी बार एगो दिया तोहरा याद में जराएब.
कलिख अपना मन के ओकरा रौनक से मिटाएब.
कुछ ना मिलल नफरत कर के, हो गइनी अकेला.
लोर भरल अंखिया से देखनी, हम दुनिया के मेला.
छलकत अंखिया के गगरी के, हँसी से सजाएब.
अबकी बार एगो दिया तोहरा याद में जराएब.
घर भइल मोरा खँड़हर, डहकत हमार अंगना.
ई उहे दर ह जहाँ कबो बाजे तोहार कंगना.
रंग-रोगन कर के, पुरनका रौनक फिर लौटाएब.
अबकी बार एगो दिया तोहरा याद में जराएब.


कुछ त कहीं...

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