– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

1

पगे पग ठोकर समय के नचवना

कइसन जिनगी सटत रोज पेवना.

 

घुमल अस चकरी पलिहर जोताइल

नमियो ना  खेते  बीया  बोआइल

उमेदे से अंखुवा , फोरी  न भुंइयाँ

इहे  किसानी ,आ  ओकर बोलवना. कइसन जिनगी……

 

बहल पछिमहिया बीरवा झुराइल

अब माथे लउर , आउर घहराइल

जरल नाही  चूल्हा कई कई बेरा

बबुआ क बतिया कटइला बिछवना. कइसन जिनगी……

 

झै – झै आ कट कट सांझे सबेरे

बिना दिया बाती कुच कुच अन्हेरे

फाटल झुल्ला शरम टुक्का टुक्का

इहे बा मजूरी, टाटी क छवना. कइसन जिनगी……

 

भुंवरी बा बिसुकल बबुनी लोराइल

भइल  बन  गोइंठा दुअरे पथाइल

कोयर ना  भूसा  , टटाले  भुंवरी

मुवल नेकनीयत बिसरल सपना. कइसन जिनगी……

2

सूरत  ना हमरी निहारी ए राजा

सीरत के बतिया बिचारीं ए राजा.

 

ढलती उमिरिया मे चिचुकल चेहरवा

अचके   भुलाइल  गावल   कहरवा

केतना ई देहिया निखारी ए राजा. सीरत के बतिया………..

 

कसक न मनवा ठसक नाही चलिया

कनवाँ  मे  करकत सरकेले बलिया

बीतल जवन मत उचारीं ए राजा. सीरत के बतिया………..

 

गरदिश मे नीकसल बाली उमिरिया

भइल मोहाल मोर तिरछी नजरिया

हियवा के टीस मत उभारीं ए राजा. सीरत के बतिया………..

 

कहवाँ बचल अब पतरी कमरिया

घेरले जाता रोजे नवकी बीमरिया

पहिलकी पिरितिया सभारीं ए राजा. सीरत के बतिया………..

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