KaviSammelanDelhiAug14

– ओेमप्रकाश अमृतांशु

कविता अइसन विद्या ह जेकर उमिर दस-बीस साल ना सैकड़ो-हजारो साल होखेेेेला. जेकरा के अनपढ़ो सुन सकेला, गुनगुना सकेला. कवि के कविता के भाव में दरद, आक्रोश, प्रेम आ ढ़ेरन अभिव्यक्ति के समावेश होखेेला. कविता में नदी के जइसन बहाव होखेेला. दू-चार-दस लाइन में आपन बात कहके, मुसुका के, इठलाके, नेह- स्नेह के दिया जराके, रग-रग में जोश भरके, समाज के अगाह करके, नया समाज के सिरिजन करेले कविता. कविता के भाव जब परगट होखेला, समाज क्रांति के पथ के ओर अग्रसर होखेेला. कवि के नस-नस में कवि के भाव हिलकोर मारत रहेला. अइसने कुछ जोशिला भाव के धार देखे आ सुने के मिलल मैथिली-भोजपुरी राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में.

10 अगस्त 2014 अतवार के दिने प्यारे लाल भवन, नई दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में अजब-गजब के भाव सुन के लोग भाव-विभोर भइल. हर साल का तरह मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली के ओर से कार्यक्रम आयोजित रहे. दिल्ली में हर साल कम से कम दू बेर भोजपुरी आ मैथिली के सम्मान में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के आयोजन होखेेला. सम्मेलन के अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार केदार नाथ सिंह मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली के उपाध्यक्ष अजीत दुबे का मौजूदगी मे कइलन.

सम्मेलन के उद्घाटन सभे दिया जरा के कइल. आपन अध्यक्षिय भाषण में केदार नाथ सिंह कहनी ‘हमरा देह में मैथिली आ भोजपुरी दूनू खून बहेला. दादी हमार मैथिली भाषी आ माई भोजपुरिया रही. भोजपुरी में किताबो लिखले बानी. मैथिली साहित्य से बहुत गहिरा लगाव रहल बा.’

स्वागत भाषण में अजीत दूबे के कहना रहे कि – बहुते संवैधानिक मान्यता पा चुकल भाषो के ई अवसर ना मिलल होेई, जवन भोजपुरी-मैथिली के दिल्ली में मिलल बा. भोजपुरी खातिर संधर्ष जारी बा. एक हजार साल पुरान भाषा भोजपुरी आज सोेलह देशन में फइलल २॰ करोड़ लोग बोलेला.

‘कवनो सीमा में बन्हाइल, ई जमीन ना ह देश…….’ भोजपुरिया युवा कवि संतोष पटेल के देश भक्ति के आगाज का साथे शुरू भइल कवि सम्मेलन में देश भक्ति के जज्बा रहल. ‘कालकंठ’ आ ‘काल चेतना’ के रचयिता मैथिली कवि चन्द्रेशो के भाव कुछ अइसने सुनाइल – ‘पत्ता-पत्ता डोल रहल छै, गावे गीत आजादी के गीत….’. देश भक्ति के लहर उठल त रूके के नाम ना लेवे. मैथिली कवि सियाराम झा ‘सरसो’ पीछे ना हटलन – देश राग….. कविता से आपन भावना देखावे के कोशिश कइलन.

भोजपुरी के जानल-मनल कवियत्री सुभद्रा वीरेन्द्र के मंच पे आवते लागेला जइसे समस्त नारी के भाव अपने आप उजागर हो रहल बा. भोजपुरिया माटी के एगो अइसन कवियत्री जेकर शब्द आ स्वर सुने खातिर लोगन में खलबलाहट रहेला – नारी जीवन के अद्भूत भाव ‘लक्ष्मण रेखा के भितरिए कैद हमार जिनिगिया ना, छलना आई भेष बदल छल-छल जाई उमिरिया ना…..’ साथ में देश भक्ति के भावनो कम ना लउकल – ‘ कबतक सूतल रहबऽ भईया, आपन चदरी तान के, नीनिया से तू जागऽ भईया, सवाल हिन्दुस्तान के .’ आपन लेखनी से देश के प्रति पल-पल चिंता करे वाला युवा आ जोशीला भोजपुरिया कवि देवकान्त पाण्डेय के रचना से वीर आ श्रृगार रस के फुहार बरसल – ‘इहे आदत हवे हमरा कि हम, सिंगार लिखिला. हम अपने गीत-गजलन में जहाँ के प्यार लिखिला…….’

‘बड़ अजगुत दिखल छि गौरा तोर अँगना….’ मैथिली कवियत्री निक्की प्रियदर्शनी आपन लेखनी के भाव से भ्रूण हत्या पे चिंता जाहिर कइली. मैथिली के वरिष्ष्ठ कवियत्री शेफालिका वर्मा के रचना – ‘मन परैछ अपन घर जे एकटा मंदिर……’ सुन के सभे भाव में विभोर भइल. भोजपुरी के युवा गजलकार मनोज भावुक के गजल सरल आ आम जन जीवन के पसीना में डूबल हमेशा ताजा रहेला – ‘ रेशम के कीड़ा के तरेह, खुद ही बनावत जाल बा. ई आदमी अपने बदे काहे रचत बवाल बा.’ ‘बात पे बात ओराते नइखे, कवनो दिक्कत के समाधान भेटाते नइखे…..’

जेकर इंतजार में सभे सुनेवाला लोगन के भीतर छटपटाहट रहेला. ओह हास्य आ वीरन के बखान करेवाला भोजपुरिया कवि कुबेर नाथ मिश्र ‘विचित्र’के नाम भोजपुरी जगत में शायदे केहू ना जानत होई. देश प्रेम के गमक इनकरो गीतन में सुने के मिलल – ‘बाबू कुअँर सिंह के भूले ना सुरतिया, मुरतिया हमरी नैना में बसे…….’ साथ में बलिया के योगदान आजादी के लड़ाई में केतना बा लमहर कविता के माध्यम से सुने के मिलल.

मैथिली के कवियत्री कुमकुम झा के रचना सावन के फुहार से भीजल रहे – ‘सावन के झिरिया आवत…..’ भोजपुरी से विनय कुमार रचना में नारी के सम्मान आ देश प्रेम के उजागर करत कहलन – ‘ प्राण से भी प्यारा आपन भारत वतन बा……

मैेथिली के विजय झा आ डॉ॰ मंजर सुलेेमान के मार्मिक रचना सभे चाव से सुनल आ ताली बजावे पे मजबूर भइल. भोजपुरी के मुन्ना पाठक आपन रचना में भोजपुरी के मान्यता के मांग करत सीधे-सीधे आज के नेता लोगन पे प्रहार करत कहलन – ‘होश में आवऽ नेता, जागी जनता धाँसी बाँस….’

भोजपुरी के जौहर शाफियावादी के गजल में गरीबी, भूख के साथे-साथ देशभक्ति के मार्मिक भाव के वर्णन सभे के रोंवां सिहरा देलस – ‘आदमी का चबाई रोटी के, आदमियत चबा गइल रोटी….’ मंच के संचालक मैथिली कवि अजीत आजाद के इनार पे दू गो आधुनिक कविता सुने के मिलल. भोजपुरी के विद्वान गरूचरण सिंह के मार्मिक भाव सभ केहू कान लगाके सुनल कि – ‘परेशानी के जहर पी रहल बा आदमी, फिर भी ना जाने कइसे जी रहल बा आदमी….’

‘गाँव वालन पे आज बा जलसा, गाँव वालन के पते नइखे . एह नगर में जीयल कठिन बाटे, रोशनी बाटे त हवा नइखे.’ आखिर जेकरा के हमहूँ सुनल चाहत रहीं उनकर बारी अइये गइल. भोजपुरी के विद्वान, चर्चित लेखक अशोक द्विवेदी के सुनहीं के ना देखहूं के मिलल. अशोक द्विवेदी के रचना में गाँव के लोगन के छटपटाहट देखे के मिलेला. अनेक रचनन के टूकी सुन-सुन के सभे लगातार ताली बजावत रहल. एकरा अलावे मैथिली के तारान्नद वियोगी, विजय झा, मंजर सुलेमान, आ बुद्वीनाथ मिश्र के रचना के भाव मेें सभे डूब के आनंद लेलस आ कवि लोगन के करेजा से धन्यवाद देलस.

मैथिली-भोजपुरी अकादमी के सचिव राजेश सचदेवा अंत में सभे के धन्यवाद देलन आ कार्यक्रम समाप्ति के घोषणा कइलन. मैथिली-भोजपुरी अकादमी के लगातार हो रहल प्रयास काफी आ सार्थक रहेला आ सराहे जोग रहेला. भले बिहार में अइसन प्रयास कबो-कबो देखल जाला, बाकिर दिल्ली में मैथिली-भोजपुरी के दू गो कवि सम्मेलन हर साल लगातार देखेके मिलेेला. मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली के सराहे जोग प्रयास खातिर हमरो ओर से बहुत-बहुत धन्यवाद बा.

जय भोजपुरी! जय मैथिली! जय भारत!

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