– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती

N_Pandey_Dehati
मंदिर में मंथन भइल, मिली जाम से मुक्ति?
जाम-झाम क नाम पर, आपन-आपन युक्ति..
नगर निगम में धांधली, गेट में ताला बंद.
लाठी चार्ज में बहल लहू,ऊपर से शांतिभंग..

महानगर में रोज मिलें, मरल-परल नवजात.
निर्ममता आ निर्लज्जता, कऽ अइसन सौगात..
उड़न परी जब उड़ चलल, रेल के नियम तोड़.
मवाना मैराथन जितली, आइल अइसन मोड़..

किताबुल्लाह प्रकरन में, पुलिस करेले खेल.
आखिर कवले इ चली, खादी-खाकी मेल..
बरहजवाले नेताजी, बसपा के जायसवाल.
दिल्ली में सीबीआई, पूछलसि बड़ा सवाल..

व्यवसायी से रंगदारी, मांगत हौं रंगदार.
माल्हनपार की घटना से, सहमें दुकानदार..
सभ्य भए सुविधा बढ़ी, उखड़त बावे मूंछ.
बेवस्था भुरकुस भइल, दिहले एटीएम कूंच..

ग्रामीण अंचल में देखीं, भइल व्यवस्था फेल.
आटा चक्की बंद पढ़ाई, दुर्लभ किरासन तेल..
गैस के किल्लत भइल, रोटी भइल मुहाल.
वितरण बेवस्था सुधरे के, झूठ बजावस गाल..

एही गैस का कारने, पीपीगंज दबंग.
कट्टा तानि के भग गए, देखनी अइसन जंग..
भ्रष्टाचार के दीमक, चट्ट करत बा मुल्क.
यूनिवर्सिटी में हजम, इकइस लाख क शुल्क..

सक्रिय भए शिक्षा माफिया, बोर्ड करत बा भूल.
परीक्षा केंद्र बनत बाड़े, ब्लैकलिस्टेड स्कूल..
मनरेगा में का कहीं, भ्रष्टाचार के भेंट.
सौ दिन फावड़ा चलल , जा में रहल ना बेंट..

भ्रष्टतंत्र में लूट के, अइसन बिछल बा जाल.
गरीबन के निवाला देखीं, पहुंचत बा नेपाल..
महानगर अउर जिलन के, का बतलाई हाल.
ताबड़तोड़ डकैती चोरी, ‘देहाती’ बड़ा बवाल..


अपना बारे में देहाती जी के कहना बा –

देखने में भले गोरा नहीं , थोडा सा कम काला हूं
कट्टा बम बारूद नहीं, लेकिन चुभने वाला भाला हूं
हिंदी के अखबारों में, भोजपुरी का व्यंग्य लिखूं
शहर में रह कर बना देहाती, ऐसा पेपर वाला हूं.

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