– ओ.पी. अमृतांशु

नीमिया भइली कचनार,
महारानी रउरी अँगना में !

लहसेला दावाना-मडुयावा,
फुलाइल बेला फुलवा नू हो,
ए मईया, गमकेला ओढ़ऊल हार
महारानी रउरी अँगना में !

चम-चम चमकेला मुखड़ा,
कि लाखो चंदा टूकड़ा नू हो,
ए मईया, दमके त्रिशूल-तलवार
महारानी रउरी अँगना में !

पुआ-मिष्ठान, छप्पन भोगवा,
लागल बा झुलनवा नू हो,
ए मईया, झूमत बाटे शीतलि बेयार
महारानी रउरी अँगना में !

भरि गईलें बांझिनी के कोखवा,
पोछाई गईलें लोरवा नू हो,
­ए मईया, ओपिओ करत बा गोहार
ए मईया, आइल बा ‘अंजोरिया’ परिवार
महारानी रउरी अँगना में !


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