ये  दुलहा

– ओ.पी .अमृतांशु

पाकल मोछवा बोकावा के पोंछवा
रुपवा गोबरे लिपावल ! ये  दुलहा.
माथे मउरवा सजावल ! ये  दुलहा.

अइलऽ गदहिया पे, नाहीं तू नहइलऽ,
आखीं कजरवा ना माई से करइलऽ,
उबड़-खाबड़ बाटे लिलारवा
चूनवा वोही पे टिकावल ! ये  दुलहा.
माथे मउरवा सजावल ! ये  दुलहा .

लेके दहेजवा बगलिया में धइलऽ,
एको खिली पान ना मुहंवा में खइलऽ,
टूटल दंतवा पचकल गलवा 
होंठवा में आलता छुआवल ! ये  दुलहा.
माथे मउरवा सजावल ! ये  दुलहा.

बढ़नी से बहराई के अइलऽ,
हँसेला लोगवा, अँगनवा समइलऽ,
कउआ जइसन गोर बदनवा.
बाड़ऽ कोठिलवा के काढल ! ये  दुलहा.
माथे मउरवा सजावल ! ये  दुलहा.

अइलऽ बहिनिया के लेईके ओढ़निया,
भाभी सिखवली ना छुए के चरणिया,
साली से हँसेलऽ ना बोलेलऽ वर,
हाय नाचवा के लागेलऽ नचावल! ये  दुलहा.
माथे मउरवा सजावल ! ये  दुलहा .

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11 Comments

  1. वाह!दुल्हा के परिछावन गीत त बहुते नीक बा .काश एकर धुन पता रहित त मजा आ जाइत .
    किरण

  2. बढ़नी से बहराई के अइलऽ,
    हँसेला लोगवा, अँगनवा समइलऽ,

    बहुत बढ़िया लागल .राउर रचना में दुल्हा से हंसी -मजाक .
    भोला प्रकाश

  3. प्रणाम जी

    बहुत सुन्दर रचना कईले बानी.

    धन्यवाद

  4. दुलहा के साथे हंसी -मजाक कइल,
    हमनी के इहाँ परंपरा ह.
    मजा आ गईल.
    साथ में शादी के इयाद भी आ गईल .
    धन्यवाद !
    रंजित कैरोस

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