भोजपुरी लस्टम पस्टम

28 Apr 08

ले आवऽ त जानी

- जयन्ती पाण्डेय

सबेरे सबेरे लस्टमानंद आ रामचेला में बहस हो गइल गरीबी पर. रामचेला अड़ल रहले कि देस में गरीबन के संख्या लगातार बढ़त जा ता. ओने बाबा के कहल रहे कि गरीबी कम हो रहल बा. रामचेला के कुतर्क से बाबा रिग गइले आ खिसिया के कहले कि जा एगो गरीब जोहि आवऽ.

रामचेला कहले एह में जोहे के का बा? गांव के एगो कुकुरो जाने ला कि के गरीब हऽ. चट दे ओहि के काट दी. जब ऊ खैराती अस्पताल में जाई त दवाई सूई ना मिली. ई का कम बा?

बाबा हँसले रामचेला ई परिभाषा से काम ना चली. सरकार बहादुर गरीबी के परिभाषा गढ़े खातिर दिनरात एक कइले बा आ गरीब हऽ कि ब्ह्म अइसन भेंटात नईखे. सरकार के मन होला कि भ्रष्टाचार न गम के जे पोसपुत के पाल पोस के अब सियान क दिहलस ऊ खतम हो जाय. पर ऊ खतम होखे के नांवे नइखे लेत त गरीबी कइसे मिट जाई. कई बेर कोसिस भइल कि बाढ़ बुड़ा में डूब मरऽ सन चाहे आन्ही पानी में उधिया जा सन त जान बांच जाई. लकिन त ई एनजीओ से ले के यूएनओ ले लागे ले सन डेकरे. बड़ा फजीहत हो जाला आ आखिर में राहत पठावे के परबे करे ला.

सरकार के मन होला एगो अईसन परिभाषा बना लऽ कि जे ओकरा में फिट होई उहे गरीब. जइसे जेकरा रहे के घर ना होखो, गाछि तर रहे, ओही गाछ के पतई खाय तबो मोटात जाय आ दनादन लइका पएदा करे. ऊ लईकन के माई ओकनी के खूब ठेठावे आ केहु बे बाल बच्चा वाला के बें देऊ ना त भीख मंगवाये, चोरी करवाये. ....इस्कूल ना भेजे.

बाबा कहले कि एक दिन पेपर पढ़ि के बड़ा हंसी लागल. एतना हँसनी कि रोए के परल. ऊ का कि सरकार के कहल हऽ कि जे १३ गो शर्त पूरा करे ऊहे गरीब कहाई. ई पढ़ते हँसी फूट परल. अब हम आप सब के बतावत बानीं. आप सब हंसी आ माथा पीटीं.

सरकार के नजर में ऊ गरीब ना कहाई जे दूनो बेरा खा लेत होखो आ जिनका देहि पर तनी मनी कपड़ा होखो चाहे जेकरा लगे तरकारी उगावे लायक जमीन होखो. अकबार में लिखल रहे कि पहिले देस भर में ४ करोड़ गरीब रहले सन बाकिर जब एह सांचा में गरीबी के डालल गइल त चट से ओकर संख्या घट के ३ करोड़ हो गइल. माने सीधे एक चौथाई कम.

एक ओर सरकार के कहल कि सब बच्चा इस्कूल जाय. खबरदार ना पधवलऽ त! गांव गांव का देवाल पर चूना से लिखवावल बा चलो इस्कूल चलें लेकिन जब लइका इस्कूल जाए लागी तब ओकरा बाप के नाम बीपीएल, माने गरीबी के गौरमिंटी लिस्ट, से काट दिहल जाई. माने कि बाप के गरीबी रेखा से नीचे वाला आदमी बनवले राखे खातिर बेटा के अनपढ़ रहल जरुरी बा.

गांवन में ई सब होत रहेला. बलाक के बड़ा बाबू के रजमतिया के इया गारी देले कि ऊहे मुँह झँउसा जबसे अ५लस हमार पनसिन बन्न हो गइल. बाबू ओकरा कान में चिलालें ए बुढ़ियो नवका सर्वे में तूं गरीब नइखू रह गइल. तहार नांव लिस्ट से कटा गइल. त तहार पिन्सिन कइसे भेंटाई?

लेकिन हमार गत त ओसहींबा. कवनो सुधार नइखे. त हमार नांव कइसे कटा गइल?

अच्छा, ई बतावऽ कि जब तूं बेमार रहलू त अपना भतीजी के लगे चल गइल रहलू कि ना ईलाज करवावे? आ तहरा भतीज दमाद का लगे चालीस बीघा खेत बा. नवका सरपंच लिखले कि तहरा लगे गुप्त सोना बा, ओहि का लोभ में भतीजी अपना लगे रखले बिया.

बुढ़िया लगलस रोवे, लेकिन के सुनत बा? लिखतम का आगे बकतम ना चले.

अब ई के बतावे कि सारा अमला आ सारा सिस्टम लिखला पर चलेला बोलला पर ना. सर्वे समय जे आदमी सवालन के आन्हीं बोलल बऽ कइलस, बुझऽ ओकर नाम लिस्ट से गायब. बोली बन्न भइल कि गरीबी भागल .

भाई रामचेला गरीबीके परिभाषा अतना कठिन बा कि केहू गड़ीब होइये ना सके. आ एहमें तू चलल बाड़ऽ गरीब के जोहे?