भोजपुरी लस्टम पस्टम
करार कथा में राहु केतु
- जयन्ती पाण्डेय
काल बड़ा दिन के बाद बाबा लस्टमानंद खड़ाऊँ चटकावत रामचेला के दुअरा पहुंचले. दंड परनाम के बाद अपना आसन पर बईठ के गुरु कहले, भाई रामचेला, आजु सबेरहीं से मन में एगो बात घूमत रहे. ना कल परल हऽ त तहरा लगे आ गइनीं हँऽ.
रामचेला कहले, बतावऽ गुरू अइसन कवन बात बा?
गुरू लस्टमानंद एकदम सीरियस हो गइले. उनकर मुंह देखे से बूझात रहे कि कवनो भारी गंभीर बात हऽ. गुरू खंखार के कहले, हम तहरा के एगो कथा सुनायेब. एकदम बैताल पचीसी के कथा अइसन. तूं जे ओह कथा के आजु के संदर्भ से जोड़ लेबऽ त हमरा के रस पानी करावे के होई. रामचेला त अक्सर गुरू के दुअरा पर चायपानी करत रहेले, एहसे निसंकोच कहले, हँ हाँ. आ अगर जे तूं ना जोड़ पवलऽ त दू बेर रस पानी करवाये के होई. रामचेला तइयार हो गइलें त गुरू लगले बतावे.
एक हालि एगो राजा रहे. इहे जम्बू द्वीप के भारत देस में. ऊ दुनिया के चक्रवर्ती सम्राट से एगो समझौता कइलस. एगो भारी करार. पहिले त कई बरिस ले ओह करार के परिपूर्ण करे खातिर राजा आपन अमला फइला के झुनझुना थमा देऊ, ले के बजावत रहऽ. अब ई करार के टीपन में नया पेंच लऊके लागल. करार के कुंदली में पंचवा घर में राहू आ सतवां घर में केतु वुहस्पति के दुनूं ओर गेंड़र मार के बईठल बा लोग. एक ओर से राहु आ अक ओर से केतु, दुनूं मिल के राजगद्दी के पउआ घींचे लागऽ ता लोग आ सिंहासन डोले लागऽ ता. हाला हो जा ता कि गद्दी उलिटल. कसहुं राजा जे राहु केतु के शांति करावऽ ता त कुंदली में बईठल शनि आपन अढ़ैया आ साढ़ेसाती से लागऽता डेरवाये. आखिर एकदिन अइसन आइल कि राजा खिसिया गइले आ ओंने राहु केतु कह देहले सन कि राजा के उलिटऽब सन. मामला बढ़ गइल. झुनझुना बाजल बन्न हो गइल.
अबहीं ई चलते रहे कि राहु लगले राजा के बढ़ाई करे आ केतु लगले नरमी देखावे. लोग हरान.
एतना कहि के लस्टमानंद चुपा गइले आ कहले कि रामचेला, आजु के जमाना से जोड़ के बतावऽ. रामचेला कहले, अरे गुरू, ई त भारत अमेरिका परमाणु करार कथा हऽ.
लस्टमानंद कहले, बिल्कुल ठीक. अब अंगना में खबर भेजऽ कि सबेरे के बेरा बा, जल्दी सजाव दही के दू लोटा रस भेजो लोग. एतना कहि के लस्टमानंद आपन बे-दांत के मुँह खोल के हँसे लगले, हा... हा...हा!

