– आलोक पुराणिक

बाबाजी लोग के हल्ला बा आजुकाल्ह. दिल्ली के बाबा भीमानन्द के कालगर्ली रैकेट देख के इहे समुझ में नइख आवत कि अब बाबाजी लोग के मुहल्ला कवन बा. सगरी मुहल्ला ओहि लोग के लउकत बा. जेकरा के बाबजी बुझऽ उहे कालगर्ल के भँड़ुआ निकलत बा. जेकरा के कालगर्ल के भंड़ूआ समुझऽ ऊ विधायक निकल जात बा. जेकरा के विधायक समुझ उ हथियार के दलाल निकलत बा. जेकरा के सिर्फ हथियारन के दलाल समुझऽ ऊ कालगर्ल्स के भँड़ुआ निकलत बा. आ जेकरा के भँड़ुआ समुझऽ ऊ बाबाजी निकलत बा, साईँराम कहत भेंटा जात बा. एक बेर ना दू दू बेर.

बेटा बाबजी कई तरह के होलें कक्षा में हम बाबजी लोग का बारे में समुझावत बानी.

एगो छात्र कहत बा, जी हमरा पता बा. एह घरी तीन तरह के बाबाजीअन के हल्ला बा. कालगर्ल्स वाला ढोंगी बाबा, कई गो शादी रचावे वाला फर्जी बाबा, आ साउथ में एक्ट्रेस का साथे सत्संग करे वाला बाबा. बाबागिरी के काम बहुते मुश्किल होला. चाहे त कालगर्ल्स के रैकेट चलावे ना त फेर कवनो एक्ट्रेस का साथे रैटपैट करे के पड़ी. साधना के राह बहुते दिक्कत भरल होला, ई बाति अइसही ना कहल जाले.

ना बेटा. साधना के बात समुझे के कोशिश करऽ. ढोंगी बाबा का मामिला में साधना आ उपासना कालगर्ल्स के नाम रहुवे. मंत्र आ तंत्र ओह भँड़ुआन के नाम रहुवे जे बाा के कालगर्ल्स खातिर गाहक पटावत रहऽ सँ. बाबा हर डील से पहिले दू हालि भगवान के नाम लेत रहलें. ई उनकर कोड वर्डो रहे. हम समुझावे के कोशिश कइनी.

हँ, रउरा बतवले रहीं कि हर महत्वपूर्ण काम करे से पहिले दू बेर भगवान के नाम लेबे के चाहीं. बबोजी इहे करत रहलें. ऊ बाबजी राउर स्टूडेण्ट रहलें का ? दोसरका छात्र पुछत बा.

ना. कालगर्ल्स के कारोबार करे वाला हमार छात्र ना रहलें सँ. हम डाँटत कहत बानी.

एगो दोसर छात्र बहुत समझदारी के बात कहत बा, जी उहे हमरो बुझात बा. कालगर्ल्स के कारोबार करे वालन के त आपन स्कूल, कालेज, अस्पताल होला. एहू ढोंगी बाबा के अस्पताल बनत रहुवे. कालगर्ल्स के कारोबार करेवाला त दोसरा के पढ़ावे के कूवत राखेलें, ऊ रउरा से पढ़े का अइहें?

ना बेटअ, तू बात के समुझ नइखऽ पावत. बाबा ढोंगी रहुवे, बहुते बदमाश रहुवे, हम समुझावे के कोशिश करत कहनी.

सर जी, कवनो सीधा साधा बन्दा कहाँ पहुँच पावेला का बाबा का लेवल ले. हमार चाचा सीधा सच्चा मास्टर रहलें, चाचीओ उनका के ना पुछत रही. एने बाबा के सत्संग में छह सौ कालगर्ल्स रहत रहलीं सँ. बंदा हैसियत बनावे त अइसन! अगो छात्र अपना चाचा के दुर्दशा के बात करत कहत बा.

बेटा, तू बात के पूरा तरह से समुझे के कोशिश करऽ. जरुरी नइखे कि कालगर्ल्स के कारोबार करे वाला हर बंदा बाबा के लेवल ले चहुँप जाय. कई गो त विधायके भा पार्षद के लेवल ले रह जालें. अतना आगा जाये वाला विरले होखेलें. हम अपना तरफ से एक्सप्लेन करे के कोशिश करत बानी.

सर, पहिले क्लियर करीं कि रउरा बाबाजीअन का बारे में बतियावत बानी कि चोर उठाईगीरन का बारे में. रउरा बीच में विधायक पार्षदन के ले के आ जात बानी. एगो छात्र आब्जेक्शन करत बा.

बेटा, ठगन से बात शुरु करऽ त बाबाजीअन ले चहुँप जाले. बाबाजी से बात शुरु करऽ त कालगर्ल्स ले चहुँप जाले. बहुते अझूराइल मामिला होला एकनी के. तू समुझे के कोशिश करऽ ना. हम आगा समुझावे के कोशिश कइनी.

सर, रउरो समुझा कहाँ पावत बानी? छात्र खिसिया के कहत बा.

वइसे रउरे बताईं, ऊ गलत कहत बा का ?


आलोक पुराणिक जी के पुरनका अगड़म बगड़म


आलोक पुराणिक जी हिन्दी के विख्यात लेखक व्यंगकार हईं. दिल्ली विश्वविद्यालय में वाणिज्य विभाग में प्राध्यापक हईं. ऊहाँ के रचना बहुते अखबारन में नियम से छपेला. अँजोरिया आभारी बिया कि आलोक जी अपना रचनन के भोजपुरी अनुवाद प्रकाशित करे के अनुमति अँजोरिया के दे दिहनी. बाकिर एह रचनन के हर तरह के अधिकार ऊहें लगे बा.

संपर्क 09810018799
email : puranika@gmail.com


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