– आलोक पुराणिक

ई सीन सन् 2508 मतलब कि करीब पांच सौ बरीस बाद के ह.

स्पांसरमय सब जग जानी, करहु प्रणाम….. – के वचनोच्चार का बाद संत जालीदास रामकथा कहे के तैयारी शुरु कर दिहले बाड़न. स्पांसर जुटावल जा रहल बा. जालीदास के मार्केटिंग मैनेजर अपना एक्शन के ई रिपोर्ट पेश कइले बाड़न –

सबले बेसी स्पांसर रावण खातिर मिलल बाड़े. एगो से बेसी अफेयर में दिलचस्पी राखे वाला रावण के कैरेक्टर के स्पांसर बहुते दिलचस्प मानत बाड़े आ उनकर कहना बा कि ज्यादा टाइम इहे अफेयर वगैरह देखावल जाव. बाकी प्रवचन, सदाचार, सत्य वत्य के बातन में टाइम फालतू बरबाद ना कइल जाव. रावण के दरबार में अमेरिकन सुंदरियन के नृत्य देखावल जाय त एगो अमेरिकन कंस्ट्रक्शन कंपनी पचास करोड़ के स्पांसरशिप देवे के कहले बिया.

आ ऊ वाली मोबाइल कंपनीओ रावणे का नाम पर स्पांसरशिप देवे के राजी भइल बिया. ओकर माँग बा कि रावण के दसों मुंहन के आपस में फ्री बातचीत के सीन देखावे के होखी. सगरी मुंहन का लगे ओकरे ब्रांड के मोबाइल सर्विस होखे के चाहीं. ओकरा सर्विस में आवाज कतना साफ बा ई देखावे खातिर रावण जे बा से कि विभीषण के मोबाइले पर डांटी. आई थिंक, स्टोरी में अतना एडजस्टमेंट त हमनी करिये सकीले. रावण के मोबाइले से राम के सेना के धमकावत देखावल जाई.

आईएसडी कालो ओकरा सर्विस में एकदमे क्लियर होला, ई बात ऊ कंपनी फुल जोरदार तरीका से बतावल चाहत बिया. हँ, मोबाइल कंपनी इहो चाहत बिया कि हनुमानोजी के रावण मोबाइले पर डांटे, करीब सात दिन तक लगातार. हनुमानजी बोर होके भागसु, त रावण बोली, रुक ! अबही बहुते टाक टाइम फ्री बाचल बा. पीछे से बराबर स्लोगन चलत रही – फलां मोबाइल सर्विस पर आईं, 465 दिन के टाक टाइम फ्री ले जाईं.

कुंभकर्ण खातिर एगो अमेरिकन दवा कंपनी से आफर बा. एहिजा हमनी के बतावे पड़ी कि कुंभकर्ण नींद के जवन गोली खाके सूतेला ऊ एही अमेरिकन कंपनी के होला. बैकग्राऊंड में स्लोगन चली – रउरा बानी नींद का खोज में, लीहीं हमनी के गोली पूरा मौज में.

कुछ स्टाक ब्रोकिंग कंपनियो इश्तिहार देवे के तैयार बाड़ी सँ. पूरी लंका में स्लोगन लगावल जाई – स्टाक बाजार से कमाईं, आ आपन सोना के लंका बनाईं. बस एहमें अतने करे के पड़ी कि रावण के दरबारी दुपहरिया में कंप्यूटर के टर्मिनलन का सामने बईठल सेनसेक्स के आंकड़े वगैरह देखत नजर आवे के चाहीं.

बस एगो पेंच इहे रह जात बा कि रामजी के सदाचार, सत्य वगैरह खातिर कवनो स्पांसर नइखे मिलत.

बाई दि वे, का रामजी के हमनी के कथा में राखल जरुरी बा ? खाली रावणे से काम ना चल पाई का ?


आलोक पुराणिक जी के पुरनका अगड़म बगड़म


आलोक पुराणिक जी हिन्दी के विख्यात लेखक व्यंगकार हईं. दिल्ली विश्वविद्यालय में वाणिज्य विभाग में प्राध्यापक हईं. ऊहाँ के रचना बहुते अखबारन में नियम से छपेला. अँजोरिया आभारी बिया कि आलोक जी अपना रचनन के भोजपुरी अनुवाद प्रकाशित करे के अनुमति अँजोरिया के दे दिहनी. बाकिर एह रचनन के हर तरह के अधिकार ऊहें लगे बा.

संपर्क 09810018799
email : puranika@gmail.com


आलोक पुराणिक जी के वेबसाइट

Advertisements