भउजी हो !
के ह? केकर भउजी? कइसन भउजी?

केंवड़िया खोलबू त देखिए लेबू. जानत बानी कि खिसियाइल बाड़ू. ढेर दिन पर आइल बानी.
कनिया आवे के परमिशन दे दिहलसि?

अरे ना भउजी, उनकर दोष नइखे. एह घरी हमहीं असकतायाए लागल बानी. नयका सब सुनत नइखन स आ पुरनका लोग थाके लागल बा. बाकिर आजु सोचनी ह कि भउजिए से कुछ बतियावल जाव. ढेर दिन होइयो गइल रहल ह.
तब समय कइसे कटत बा?

भोरे अखबार पलटीलें आ साँझि बेरा टीवी का सोझा बइठ के चैनल वालन के चोंचिला देखल करीलें.
बहुते हिमतगर बानी जे अतना कुछ झेल जाइलें. हमार त टीवी खोलते मन झनझनाए लागेला.

तहरा त नीक लागे क चाहीं. तू त शुरुए के सेकुलर हउ.
आजुओ हईं. बाकिर ऊ ना जवन ई कुल्ही बकत बाड़ें आजु काल्हु.

ऐ भउजी सेकुलर क माने दुनिया में जवन होखत होखे अपना देश में एकर मतलब हिन्दू के खिलाफ होला.
ना बबुआ, अब एकर मतलब देशे का खिलाफ माने लागल बाड़ें सँ ई नयका सिकुलर. देखनी ह ना कि तंजीम अहमद के खून का खिलाफो एको कुकुर ना भूंकले हँ स. जबकि एगो घोड़ा के टाँग का नाम पर कई दिन ले हल्ला मचवले रहले सँ इहे कुकुरा.

त तहरो जइसन लोग के पाला बदलवा दिहले सँ ई सिकुलरवा जमात ?
एकनी के बस चले त देश के बरबाद करा द सँ ई. आ जानत बानी काहे?

ना भउजी. तूहीं बता द.
पहिला त ई कि एगो दूगो चैनल छोड़ के सगरी चैनलन के असल मलिकान विदेशियन का हाथे बा आ दोसरे ई कि बहुतन के नाम हिन्दू जइसन बा बाकिर हवें स गैर हिन्दू.

एही से नू कहल जाला कि भारत में जदि रहे के बा त वन्दे मातरम कहे के होई.
हँ ए बबुआ, तबे भारत के विजय होखी.

चला भउजी तुहीं बोला – भारत माता की जय !
भारत माता की जय !

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