भउजी समुझवली दिल्ली के दाँवपेंच

भउजी हो !
अरे बबुआ ! आजु सूरुज केने से उगल रले हँ ?

का भउजी, फेर शुरू हो गइलू ?
त का करीं ? कतना महीना बाद भउजी याद पड़ली ह, याद बा ?

छोड़ ई सब. आजु कुछ अझूराइल सझुरवावे आइल बानी.
का ?

दिल्ली में सरकार बनावे के नाम पर कवन तमाशा होखत बा, दिमागे चकरा जात बा. कांग्रेस बना ना सके, भाजपा बनावल नइखे चाहत, आ आ पा बेर बेर कहत बिया कि भाजपा चुनाव से डेरात बिया. ना त जा के कहि काहे नइखे देत कि हमनी का सरकार बनावल नइखीं चाहत, चुनाव करवा लिहल जाव.
केजरीवाल नीमना नीमना नेतवन के कनाट प्लेस पर बेच दी आ ओह लोग के पतो ना चली. जानल चाहत बानी त तनी धीरज राखे के पड़ी. पूरा बात सुनब तबहिए समुझ पाएब.

चलऽ समुझावऽ.
आ आ पा फेर उहे खेल खेले में लागल बिया जवन पिछला बेर खेलले रहुवे. काहे कि केजरीवाल के मनसा बा कि केहू तरह सरकार फेर बना लेव. देखत नइखीं कि आजु ले सरकारी डेरा खाली ना कइलसि. ओकर चाल बा कि भाजपा के अतना रिगा दिहल जाव कि ऊ पिछले बेर का तरह सिद्धान्त बघारत कह देव कि भाजपा का लगे संख्याबल नइखे से सरकार ना बना सके. जसहीं भाजपा आ आपा के चाल में फँसी केजरीवाल तुरते दावा करी कि हम दिल्ली के जनता पर फेरू से चुनाव के बोझा नइखी डालल चाहत आ हम सरकार बनावे ला तइयार बानी. ओकर चाल बा कि अल्पमत के सरकार बनावे आ भाजपा के ठेंगा देखावत ओकरा छाती पर मूंग दरत रहो. कांग्रेस के त हिम्मते ना होखी सरकार गिरावे के काहे कि तब आ आपा वाला कहीहें कि कांग्रेस भाजपा से मिल गइल आ अगर भाजपा सरकार गिरा देव त कहे में आसानी रही कि एह पार्टी के दिल्ली के जनता के दिक्कत से कवनो मतलब नइखे. ई त बस सत्ता सुख भोगे ला बेचैन बिया.

त फेर भाजपा का करो ?
उहे, जवन करत बिया. बार बार कहत रहो कि सरकार बनावे के नेवता मिलो त सोचल जाई ना त चुनाव ला हमेशा तइयार बानी. अगर बोला लिहल जाव त भाजपा अल्पमत के सरकार बना लेव. ओकरा कवनो तरह के तोड़ फोड़ करे के जरूरते ना पड़ी. हर बेर कुछ लोग गैरहाजिर हो जाई भा कवनो बहाना बना के वाक आउट कर जाई. काहे कि भाजपा विरोधी जानत बाड़े कि जीते के इचिको उमेद नइखे त काहे ना पाॅच साल ले विधायकी के आनन्द लेइए लिहल जाव.

वाह भउजी, बात एकदम साफ हो गइल. चलऽ अब एही बात पर चाय बना द.
ना, चाय हम ना बनाएब. चलीं आजु रउरा बनाईं.

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