भउजी हो! शौचालय पहिले कि देवालय?

भउजी हो!
का बबुआ?

शौचालय पहिले कि देवालय?
का बाति बा? पेट खराब हो गइल बा का?

ना भउजी. राजनीति में एह घरी एही पर बहस चलत बा त सोचनी काहे ना तहरा से पूछीं कि कवन पहिले?
ए बबुआ, हम त इहे जनले बानी कि दिशा मैदान, शौच कर्म पूरा कइला का बादे देवालय जाए के चाहीं.

त फेर जय जयराम सही कि जय श्रीराम?
जय श्रीराम.

काहे दुनु त एके बतिया कहले.
ना बबुआ. समुझे के फेर बा. जयजयराम देवालय के तुलना शौचालय से कइले रहले. कहले रहले कि देवालय शौचालयो से गंदा लागेले स. आ एही ला उनुका बात के विरोध भइल रहे. होखहू के चाहत रहे. बाकिर घरे घरे गाँवे गाँवे शौचालय बनवावे के बात में कवनो खराबी नइखे. आ बनहू के चाहीं. देवालय भलही भर गाँव में एगो बने बाकिर शौचालय घरे घरे बने के चाहीं.

ठीक कहतारू भउजी.
छोड़ी ई सब बात. दिशा चलीं कुछ नाश्ता बनावत बानी. शौचालय घूम लेले बानीनू? ना घूमले होखब त जाईं घूम लीं. खालिए पड़ल बा.

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1 Comment

  1. इ देस में अधिकतर लोग अईसन बा जे बाल के खाल निकालता ,भगवान् जाने ओकरा समझ बा की ना ,उ कहल गईल बात के अर्थ ना समझ के अनर्थ पर अपनों आ दोसरो के मतिभ्रम में डाल देता .
    जब तन स्वच्छ रही तबे नु भगवान् भक्ति होई .येही से सौचालय पहिले बने के चाही .
    नीमन सिंह

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