भउजी हो!

का बबुआ?

आपन नोटवा भंजा लिहलू कि ना ?

हमार नोटवा त कहिये भँज गइल, रउरा अपना कनियवा वाला नोट जल्दी भंजा लीं।

का भउजी, तोहरा हमेशा मजाके सुझेला! हम पाँच सौ आ हजरिया नोट का बारे में पूछनी हँ।

अरे ओहिजा अबहीं लमहर लमहर लाइन लागत बा। कुछ दिन बाद जाइब। आ उहो कवनो अधिका नइखे। राउर भइया देबे कतना करेलें हमरा हाथ में। ओहिमें से थोड़ बहुत चोरा लुका के बचवले रहनी ह।

देखा भउजी, मोदिया का जिद का चलते कितना परेशानी होखत बा आम आदमी के।

अरे मार बढ़नी के रे! आम आदमी के तकलीफ के चिंता के कइल कबो हिंदुस्तान में? आ बात लाइन के करीं त जियो सिम वाला लाइन में त रउरो के तीन दिन खड़ा देखले रहीं। आ उहो दिन देखले बानी कि एचएमटी के जनता घडी ला लोग लाइने में सूतत रहे।

ऊ लाइन त कुछ पावे खाति लागत रहे, एहिजा त आपने रूपया गवावें ला लगावे पड़त बा।

ऐ बबुआ, गंवाई ऊ जेकरा लगे करियका धन बा। आम आदमी के त महज कुछ दिन के परेशानी बा। लोग त खुश बा कि देश के धन अब देश का कामे लागे जात बा। बक्सा जे धन बैंक में आ जाई त उद्योग व्यापार आ विकास ला लागे जात बा।

का भउजी, पूरा मोदिया गइल बाड़ू तू त!

हँ बबुआ, सठीयलका ले नीमन बा मोदीयइलका!

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