भउजी हो !

आईं बबुआ, हम रउरे इन्तजार में रहली हँ.

काहे भउजी ? तोहरा कइसे मालूम हो गइल कि हम आवे वाला बानी ?

रउरा का सोचीलें हम हरदम चुहानिये में रहीलें ? देश दुनिया के खबर हमरो लगे रहेला. पूछीं का जाने चाहत बानी ?

भउजी तू त आजु अगम जानी लेखा बतियावत बाड़ू. बताइये द हम का पूछल चाहत बानी.

रउरा मन में सवाल उठत बा कि आखिर का हो गइल कि अचके में ए॰राजा, नीरा राडिया, प्रदीप बैजल, करुणानिधि के परिवार, तमिल के बड़हन पत्रकार सभका किहाँ छापा पड़ गइल ?

ठीक कहलू भउजी. बाकिर जवना लोग के बचावे खातिर अतना उतजोग भइल, अतना बतकूचन भइल, ओहि लोग पर आजु अचके में सीबीआई के नजर टेढ़ कइसे हो गइल ?

एहीसे कहीलें बबुआ कि कबो कबो खेलो तमाशा देखल करऽ. शतरंज के खेल देखले बाड़ऽ? जब ले राजा भा वजीर पर कवनो खतरा ना रहे तब ले खिलाड़ी एक एक प्यादा तक ले के बचावत रहेला. बाकिर जब बाति राजा भा वजीर पर आवे लागे तब प्यादा त प्यादा, किलेबंदी कर के हाथी भा वजीर तक के कुर्बानी दे दिहल जाला. आजु जवन हो रहल बा तवन त सगरी प्यादा हउवन सँ. हमरा त लागत बा कि अब वजीरो के बारी बा जाये के. काहे कि सभे जाव त जाव राजा बाँचल रहे के चाहीं.

बाकिर ई वजीर काहे जाई?

एहसे कि ओकर मोल कवनो प्यादा से बेसी नइखे. प्यादा जब आखिरी लाइन ले चहुँप जाला त ओकरा के कबो कबो वजीरो बना दिहल जाला बाकिर असल में त ऊ प्यादे रहल, प्यादे रही. आ प्यादो के एकर पूरा भान रहेला. सुननी हँ ना कि नीरा राडिया इहाँ तक तय करत रही कि के मंत्री बनी आ केकरा के कवन मंत्रालय दिहल जाव !

एको बाति तूहू जानि लऽ भउजी. एही सब का चलते तोहरा लगे आवे से कतराइलें कई बेर. काहे कि तू अइसन साँच बोल देलू कि गरदन पर फँसरी लागे के डर बनि जाला.

ए बबुआ, साफगोई खराब जरूर होले बाकिर जरुरीओ होले.

ठीक बा भउजी देखल जाई. जब ओखर में मूड़ी पड़ले बा त मुसर से कतना डेराइल जाई.

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