– जयंती पांडेय

असल में हमनी के देश, माने हमार भारत महान, एगो दुर्घटना प्रधान आ विस्फोट प्रधान देश ह. इहां कवनो महीना बांव ना जाला जब कवनो घटना चाहे दुर्घटना चाहे विस्फोट ना होखत होखे. एगो घटना अबहीं होखबे करेला कि दोसरको रोआइन मुँह बनवले चलि आवे ला. अपना देश खातिर घटना दुर्घटना असही होला जइसे धूरा में लइकन के गिरल.

उठले, झरले, आ चल दीहले. जहिया अखबार के पहिला पन्ना पर अइसन खबर ना मिले तहिया बुझाला कि कहीं कुछ गड़बड़ा गइल बा. अब चूंकि ई घटना प्रधान देश ह त ओकरा बाद के कवनो रस्म त चहिबे करी. अपना देश में जइसे कवनो दुर्घटना होला, चाहे कवनो विस्फोट होला त तुरतले कुछ रस्म शुरू हो जाला. एह से ई पता चलेला कि हमनी कतहत देशभक्त बानी आ अपना देश में लोकतंत्र के जर कतना गहीर बा. ई रस्म के अइसन बा कि ई जानल जरूरी नइखे कि घटना कइसे भइल, का भइल.

बस ई रस्म में सबले पहिले बयानबाजी होला. सरकार बयान दी कि जे दोषी बा ओकरा के छोड़ल ना जाई, जे एकर शिकार भइल बा ओकरा मुआविजा मिली, दुनिया के सब देश एकरा खिलाफ एक हो जाये, विपक्षी दल एकर राजनीतिक फायदा मत उठावो.

ओने विपक्षी दल बोली कि ई सरकार के लापरवाही के नतीजा ह, गृहमंत्री, चाहे रेल दुर्घटना भइल त रेल मंत्री, इस्तीफा देसु, परधानमंत्री माफी माँगसु. आदि आदि. वइसे ई रिवाज में एगो आउर नया पक्ष जुड़ गइल बा. अब सत्तारूढ़ गठबन्हन में शामिल दलन के नेता लोग एक दोसरा के धूरा झोंके लागेला.

ओह में एक दोसरा के बड़ाई शिकायतो चलेला. अगर अइसन राज्य में घटना होला कि उहवां दोसरा दल के सरकार बा त केंद्र सरकार राज्य सरकार पर दोष लगावेले आ राज्य सरकार कहेला कि केन्द्र के खुफियागिरी फेल हो गइल बा. खुफिया अफसर कहेले कि खबर त दिहल रहे राज्य सरकार के लोग ओह पर अमल ना कइल. एह काँव काँव में असलकी बात त बिला जाला आ पीड़ित बेचारा संतोष क लेला आ दोसरा घटना के बर्दाश्त करे खातिर तइयार हो जाला. एकरा बाद एगो आयोग के गठन होला.

कवनो रिटायर्ड जज के आराम कुर्सी पर से धकिया के आयोग के अध्यक्ष बना दिहल जाला. अब ऊ जज साहब काँखत कूँखत आपन काम शुरू करेले.

आजु ले कबहुं आयोग के रिपोर्ट पब्लिक का सामने ना आइल. आयोग के हठन अपना देश में पिंडदान जइसन होला. एकरा बाद नेता लोग अपना पूर्वज के मुँह देखावे लायक हो जाला.

एकरा अलावे अउरी कई गो रस्म बा जइसे अभियुक्त जे धरा जाय त जेल में ओकर स्वागत सत्कार आ नेताजी के घटनास्थल पर दौरा के रिवाज आदि. ई सब अइसे होला जइसे सराध के जूठ काये के समय में कउआ काँव काँव करेले सँ. हमनी खातिर ई भले अशुभ ह, लेकिन नेतवन खातिर त इहे शुभ ह. धन्य बा हमनी के नया संस्कृति.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

Advertisements