– जयंती पांडेय

संसद के बइठक के ले के भाजपा दस दिन ले उठक बइठक कइलस. इ हमनी के लोकतंत्र हऽ लेकिन करबऽ का, हमनी का आजाद बानी सन आ आजादी के तऽ इहे मजा हऽ , जवन में आवे करऽ. चाहे संसद मत चले दऽ चाहे रेल वइसे का. लोग के तकलीफ होई तऽ वइसे का. आजादी के इहे मतलब होला. ई आजादी सेतिहे में नईखे मिलल. एकरा खातिर हमनी के पूरबज लोग ना जाने कातना कुर्बानी दिहल. कातना लोग के जान गइल. सुने के तऽ इहो ज्मिलेला कि केतना लम्पट, लबार आ चोर, गिरहकटो ई आजादी के मंगला के कारण जेल जाये वाला सर्टिफिकेट ले के अबहुओं पेंशन ले रहल बा लोग. आ आजु काल ई आजादी के बनवले रखला खातिर हमनी के नेता लोग मार पसेना बहावऽ ता. रात दिन एक कइले बा. चाहे देश के बेशककीमती खनिज के बचावे के खातिर ओकरा से आपन घर भर देवे के बात होखो चाहे अउरी कवनो. एही के चलते अपना देस के गरीब से गरीब आदमी भी ई आजादी के एंजॉय कर रहल बा. आजादी के माने होला एंजाय कइल. ई चीजे अइसन हऽ. ना तऽ के कही कि हमनी का आजाद बानी सन आ आजाद देश के बासी हईं सन. ई बात के तऽ गौरव महसूस करे के चाहीं कि जे लोंग झोंपड़ी में लंगटे घूमे ला उहो आजादी के एंजाय कर रहल बा ई देस में. आाजदी के लगभग एक महीना बाद संसद नईखे चलत तब कहीं जा के ई पता चलल ज्कि जवन देस में लोग के दू बेरा के रोटी ना भेंटाल ऊ लोग के प्रतिनिधि लोग आजादी के नाम पर देश के करोड़ों रुपया असहीं फूंक दे रहल बा.

ई बात के धेयान दिहब सब कि जब हमनी का गुलाम रहनी सन तब हमनी के मालिक लोग ई करिया लोग के एंटरटेनमेंट पर तनिको धयान ना दिहल लोग. जब आजादी मिलल तऽ ऊ नीरस जिनगी में बहार आ गइल. आज अपना देश में इहे आजादी के चलते घोटालन के बहार बा. हर स्तर पर घोटाला हो रहल बा.घोटाला करे वाला गुरू घंटाल लोग अइसन बा कि जब उनका मलाई काटे के ना मिलल तऽ ऊ लोग एकजुट हो के खाये ना देब खाना बिगाड़ देब वाला हालत कऽ देला लोग. आज जब लोग कहे ला कि खास कर के नौजवान लोग कि काम नईखे मिलत , बेकारी बा तब बड़ा बेजायॅं लागेला. हमार तऽ ई कहल हऽ कि निराश मत होखीं आपन धंधा करीं. आजु काल्हु धंधा में बड़ा इस्कोप बा. बैगन ब्रेकिंग से ले के सिंथेटिक दूध बनवला के धंधा ले असंख्य धंधा बा. दिन में भी रात में भी बा. बस अतना करिहऽ लोग कि पुलिस आ नेता जी लोग के खेयाल रखीहऽ ऊ लोग तहार रखी. पारस्परिक सहयोग से धंधा चल निकली.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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