– जयंती पांडेय

बाबा रामदेव आ अण्णा हजारे का देखादेखी नाँव कमाये के गरज से बाबा लस्टमानंदो एगो दल बनवले “विलेज दल”, आ शुरू कइले मीटिंग. कई गाँव के लोग एकट्ठा भइल. लमहर लमहर भाषण भइल, लोग के चेहरा भ्रष्टाचार का खिलाफ किरोध से भरल रहे. लोग दाँत पीसर, किटकिटात जोहत रहे कि भ्रष्टाचार कहवाँ बा, भेंटा जाइत त ममो देतीं. लेकिन सबसे बड़हन बाति बा कि
भ्रष्टाचार के जर कहवाँ बा ई नइखे मालूम. अब केहू के नइखे मालूम त जेकरा जइसन भ्रष्टाचार भेंटाइल बा ऊ ओही के बात क के संतुष्ट हो ता. पहिलका बईठक त फेल हो गइल. दोसरका बईठक ब्रह्म बाबा के तरे भइल.

पहिलका में कुछ लोग असंतुष्ट हो गइल रहे. लेकिन एह बईठक में सबके खुश करे खातिर सबके गर में माला डालल गइल. नतीजा भइल कि ओह बईठक में जतना लोग रहल सबका गर में माला लउकत रहे. भाषण शुरू भइल. भ्रष्टाचार मेटावे खातिर सुझाव माँगल गइल. केहू कुछ कहल केहू कुछ कहल, एक आदमी कहल कि अनशन कइल जाउ. भूख हड़ताल का नाँव परत सब केहू तइयार रहे बाकिर आमरण अनशन के नाँव पर केहू तइयार ना रहे. पिछलका बेर मनरखन अहीर सड़क बनवावे के नांव पर अनशन कइले रहले लेकिन ई बेर उहो तइयार ना भइले. कहले कि पछिलका हाली हमरा के बइठा दिहलऽ लोगिन, आ सब केहू रस्ता ध लिहल, हमरा के उठावहू केहू ना आइल. ई कवन बात हऽ. हमार हाल बिगड़ल जात रहे. आखिर में मुखिया जी आ के इज्जतिया बचा दिहले. अब फेर फेर सियार ताड़ तर जइहें !

सबके भीतर एगो असुरक्षा के भाव आ गइल. फेर नया नया परपोजल आवे लागल. केही कहल कि एकरा खातिर दउड़ लगावे के चाहीं. रामचेला खिसिया गइले. कहले चार डेग चलला पर त कतना लोग के दम फूलि जा ता, थहरा के बइठ जा ता लोग आ कहऽतारऽ दउरे के ! कुछ लोग कहल कि मार्च कइल जाव. गाँधियो बाबा त मार्च कइले रहले. भोला तिवारी खिसिया गइले. गाँधी बाबा के नाँव मत लऽ लोग. उहे त सब डूबवले. बात बढ़त बढ़त कांग्रेस भाजपा ले चल आइल आ मारा मारी के नौबत आ गइल. बाबा कसहूं रोकले. लोग मार्च पर तइयार भइल. अतने में केहू कहल कि मार्च करे के पहिलेकम से कम पुलिस से परमिशन त ले ल. ना त कहीं लगल पिटाये त भागे के जगहि ना मिलि. त एक आदमी कहल कि हम रोज कचहरी जानी, जे बाबू अप्लिकेशन आगे बढ़ाई ऊ कुछ पत्रपुष्प माँगत बा. कहऽ तइयार बाड़ऽ. बाबा लस्टमानंद कहले भ्रष्टाचार मेटावे के आंदोलन खातिर भ्रष्टाचार के सहारा. भाई कुछ त करही के पड़ी. पुलिस के लाठी से बाँचे के कवनो उपाय त करहीं के परी.

सब केहू तइयार हो गइल आ घूस देबे खातिर चंदा बिटोराये लागल.

वाह भाई वाह, भ्रष्टाचार मेटावे के खातिर भ्रष्टाचार के सहारा ! धन्य बाड़ऽ भाई लोग !

बाबा लस्टमानंद ओहिजा से सूरती मलत चलि दिहले.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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