एगो झाड़ू कई गो संभावना

jayanti-pandey

– जयंती पांडेय

बाबा लस्टमानंद मोदी के झाड़ू देवे वाला खबर पढ़ि के रामचेला से कहले, जवना झाड़ू से झड़ुआवे के रजमतिया के माई गारी दे ले तवने झाड़ू के अइसन फैशन आ जाई ई त केहु सोचलहीं ना रहे. ई झाड़ू के जबले घर के मेहरारू चलवली सन तबले त ई गरिये के बात रहे लेकिन जबसे मोदी जी झड़ुवले तबसे ई फैशन में आ गइल. ई जेतना लोकप्रिय भइल बा ओकरा से सोचे समझे वाला लोग के टेंशन जरूरी बा. अब सोच लीं कि जेह तरीका से झाड़ू लोकप्रिय भइल जात बा ऊ देखि के बूझाता कि जल्दी कवनो झाड़ू घोटाला होखे वाला बा. जवन झाड़ू के उपयोग साफ करे में होखे ओही के लोग साफ क दीहल. बतावऽ रामचेला ई संभावना बा कि ना. झाड़ू त चले चलावे वाला चीज है कागजे पर चल जाई पूरा झाड़ू स्टाक. अब देखऽ रामचेला ई झाड़ू के विवाद कातना बढ़ गइल. अबहीं ले कवनो इतिहासकार ई नइखे बतवले कि झाड़ू के आविष्कार कब भइल आ पहिले पहिल के चलावल. कवनो भाषाविद ई ना बतवलस कि एकर गारी कबसे शुरू भइल आ कवन मेहरारू भा मरद एकरा के कवना परिस्थिति में गारी के तौर पर प्रयोग कइलस. बतकुच्चन बाबा ओमप्रकाश जी आ भाषा सेतु बंधन वाला चौबे बाबा से निहोरा बा कि एह पर ऊ लोग तनी टार्च देखावे. हां त कहत रहनी ई झाडू के बात पर अरविंद केजरीवाल भाई कहले कि मोदी जी उनकर आइडिया चोरा लिहले. अब छप्पन ईंची के सीना वाला आदमी के बैसाखो में मफलर लपेटे वाला अरविंद भाई कहऽतारे कि आइडिया चोरा लिहले. लेकिन मोदी जी मुस्किया के कहऽतारे कि ऊ त झाड़ू चलावे के प्रेरणा गांधी जी लिहले बाड़े. अब कांग्रेसी भाई लोग खिसियाता. ई कांग्रेसी भाई लोग के के बतावे कि आज कल ऊ लोग गांधी बाबा से ना राहुल गांधी से प्रेरणा ले रहल बा. हवा त रामचेला इहो बा कि मोदी के झाड़ू चलावे से विरोध में कांग्रेस अपना आफिसन में झाड़ू ना चलावे के फैसला कइले बिया. अब कांग्रेस त पेल्हा पचवएता कि आफिस में झाड़ू ना चलावे के अब फैसला कईले बा. ई काम त ऊ ना जाने कबसे क रहल बा. इहे गंदगी से खिसिया के पब्लिक पार्टी के वोट के झाड़ू से साफ क दिहल.

बीचे में रामचेला कहले, बाबा हो, झाड़ू के ई लोकप्रियता देखि के एगो आइडिया दिमाग में आवऽता कि काहे ना सरकार एगो झाड़ू कारपोरेशन आफ् इंडिया (झाकाइं) बनादेउ आ ओह के चयरमैन सीनियर भाजपा नेता के बना देउ. बाब कहले, रामचेला एह से टंटा बढ़ि जाई. पहिले त ई कहल जाई कि कहां के झाड़ू के राष्ट्रीय झाड़ू के दर्जा दीहल जाई, महाराष्ट्र के झाड़ू कि गुजरात के कि बिहार के. एक हऽ गो पार्टी अइसन कि झाड़ू सौ सौ वेराइटी देखा दी.

त बाबा ई काहे सुझाव मीडिया में दीहल जाउ कि ईंडो पाक झाड़ू महोत्सव के आयोजन करे सरकार. एह से एक दोसरा के झड़ुआवे व्यापक अवसर आ आधार मिल सकेला. देखऽ रामचेला तहार आइडिया खराब नइखे लेकिन पाकिस्तान में झाड़ूबाजी तनी प्रचंड होला. इहे पता ना चले ला कि कवना नेता पर कब झाड़ू गिर जाई आ के केकरा के झाड़ू मार के साफ क के अपने ओहिजा काबिज हो जाई. खैर झाड़ू अब कई संभावना के जनम दे देहलस. अपनहुं सभे सोचीं.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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