– जयंती पांडेय

बाबा लसटमा नंद कहले , भाई रामचेला, जान जा कि लक्ष्मी मैया के सवारी तऽ उल्लू हऽ आ रुपिया पइसा के सवारी जरूर भईंसा होई.
रामचेला पूछले, कईसे बाबा?
काहे कि भईंसा करिया आ बरियार होले सन. जेने जाले सन ओने भीड़ छंट जाला आ जेकरा के मन करे धकिया सकेला. रुपिया भी जवन करिया होला ऊ बड़ा बरियार होला. जेकरा चाहे ओकरा धकिया सकेला, जेकरा चाहे ओकरा किनारा कऽ सकेला. अभी एफ डी आई के मामला देखऽ सरकार माइनारिटी में रहे आ सभके धकिया देहलस. जान जा कि ई शुद्ध सरकार के बल ना रहे. एह में एफ डी आई के ताकत लागल बा. एफ डीआई दुनिया के पैसा के भईंसा हऽ. जे ऊ डिसाइड कऽ लेउ कि एने ढुके के बा तऽ कोनो तरह ढुकिये जाई. भईंसा जे बा. अब जे अंगरेजी जाने ला ऊहे एकर सम्पूर्ण माया जानत होई. ओइसने एगो आदमी हमरा के बतवलस कि एफ डी आई के माने होला फारेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट. मानें कि विदेश से सीधे पइसा निवेश. हंगामा के सबसे बड़हन कारण सीधा पइसा निवेश बा. लेकिन अब हम का बताईं रामचेला कि पइसा सीधा केने से होला. पइसा अइसन टेढ़ चीज तऽ कहीं ना होला. ना आज बा ना काल्हु यहे ना काल्हु होई. तूं रामचेला अतना घुमल फिरल आ पढ़ल लिखल आदमी बाड़ऽ तूं आजु ले कवनो अइसन आदमी देखले बाड़ऽ कि जेकरा लगे पइसा होखो आ सोझ होखो. माने एफ डी आई पइसा के भईंसा हऽ. भईंसा केहु के परवाह ना करे. श्रीराम शर्मा के किताब में पढ़ने बानी कि भईंसा से बाघो डेराला. इहे कारन बा कि एफ डी आई के सामने मायाहवती जी गरजल भुला गईली. पहलवान नेताजी अखाड़ा छोड़ि के भाग निकलले आ बाहर लगले ताल ठोंके. जे अखाड़ा में ठहर गईल ऊ रगेद दिहल गइल. चाहे हार मान लेहलस. अब ऊ नियम के दोहाई दे रहल बा. अब भईंसा उनकर बात तऽ मानी ना. भगवा पार्टी के लोग राम जी के नांव ले ले के मार गदर मचावे ला आ अतना बात नईखे जानत कि गोंसाई तुलसी दास कहि गइल बाड़े कि ‘समरथ के नहिं दोष गोसाईं.’ पइसा समर्थ होला आ भईंसा भी समर्थ होला. पइसा समर्थ होला आ सबके धकिया देला. अगर तहरा बिस्वास नईखे तऽ सेठन के इहां जा के देखऽ लऽ ना डेरइलऽ तऽ गईलऽ. कवनो समारोह में जा के देखऽ बड़का सेठ के पास आम लोग कइसे हिनहिनात रहेला. ना हिनहिनाई तऽ अइसन धकियावल जाई जईसे भईंसा धकियावे ला. एफ डी आई के ना मनबऽ तऽ उहो वसहीं धकियाई जइसे भईंसा धकियावे ला.

कुछ लोग कहऽ ता कि एफ डी आई से किसान आ गाहकन के बेसी फायदा बा. माने कि अबले जे लोग किसान आ गाहक के फायदा पहुंचावत रहे ऊ गलती कर रहे. अगर ई ठीक बा तऽ अंगरेजवन के राज के गुलामी काहे कहऽ ता लोग ओकरा के राजनीति के एफ डी आई कहे के चाहीं. अगर ओकरा से ईमानदारी आ जाइत तऽ आज अतना घोटाला ना होईत. बिदेश से खाली पइसा आ सकेला नीयत नाहीं. ऊ तऽ एनहीं के लोग के रही. आ वइसे भी रामचेला पइसा के नीयत कब ठीक रहल. दुनिया के सबसे बड़हन समस्या इहे हऽ.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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