– जयंती पांडेय

अखबारन में पढ़ि के आ फोटो देखि के रामचेला पुछले बाबा लस्टमानंद से कि, का हो बाबा ई जे सुनाऽता “स्लट वाक” से का हऽ ? कामिल बाबा के डिक्शनरी में त लिखल बा स्लट माने फूहरि मेहरारू, कुलटा, कुतिया आ ढीठ मेहरारू. लेकिन फोटो ओकनी के अइसन नइखे लागत, त ई का ह स्लट वाक ?

बाबा कुछ देर सोचले आ फेर कहले, स्लट वाक के माने जानल बड़ा कठिन बा. आजु अपना देश में लोकपाल बिल का ह ई जानल जियादा आसान ह लेकिन स्लट वाक के माने जानल ओकरो ले कठीन बा. आ जहाँ तक अपना देश के लोग के सवाल बा ऊ कवनो बात पर पहिले चउँके ला आ तब भउँके ला आ तब टोकेला आ ओकरा बाद रोकेला. जब सबसे हार जाला त खुद चउँकावे वाला पार्टी में शामिल हो जाला. अब देखऽ ना, हाले में स्लट वाक के एगो बड़हन फोटो एगो अंगरेजी अखबार में छपल रहे जेहमें एगो मोट मेहरारू आपन एगो अंग के देखावत रहे. ओह जुलूस में शामिल अउरी मेहरारू सब कुछ ना कुछ देखावत रहली सँ. फोटो बड़हन रे आ अंगरेजी के अनपढ़ो लोगन के धेयान अपना इयोर खींचत रहे. ऊ फोटो देखे वालन के पहिले चउँकावत रहे आ फेर लोभा लेत रहे. अबहीं हाल में दिल्लीओ में कुछ मेहरारू स्लट वकिइली सँ. कवनो ना कवनो अंग उघरले लोग के देखे खातिर आमंत्रित करत निकलली सँ. नारा लगावत रहीं सँ कि ई जे बा नया स्त्रीवादी आन्दोलन होखी. होखो भाई. ई देश आजाद ह, सबके अभिव्यक्ति के आजादी बा. हम विदेश के नकल काहे ना करी ? पच्छिम के देशन में जवन कुछ भइल ओकर नकल अपनो इहाँ हो गइल. ओने मउगन के “गे” आन्दोलन चलल त अपनो देश में “गे” समाज बन गइल. ओने नूडल स्ट्रैप चलल त एनहुं चल गइल. जवन उहाँ होला तवन एहिजो हो जाला. ओने सिविल सोसाइटी बनल त एनहुं बन गइल. ओने तहरीर चौक बनल त एनहुं जंतर मंतर का लगे तहरीर चौक बना दिहल गइल. जहाँ ले एह शब्द के चलन में आवे के सवाल बा त एकरा पीछे एगो पुलिस वाला के करतूत बा. एक हाली एगो मेहरारू कवनो फूहर ड्रेस पहिर के सड़क पर जात रहे. ओकरा के ऊ पुलिस वाला कहलसि कि, ई का स्लट ड्रेस पहिरले बिया. अब ऊ गरीब के का मालूम रहे कि बात के बतंगड़ बन जाई. एकरा बाद एगो आंदोलन शुरु हो जाई. आ ऊ आंदोलन दिल्ली चलि आई. पहिले अइसन सब काम मुंबईये मे होत रहे. अब दिल्ली तमाशा के शहर हो गइल बा. ओहिजा लोकसभा में लंगूर के नाटक से ले के बाबा रामदेव के स्टेज पर कूदला तक के लीला होला.

बाबा कहत गइले, दिल्ली में दुनिया भर के चैनल बाड़े सँ. आप खबर दीं ना कि दउरल चलि अइहे सँ. एकदम चकाचक लाइव कवरेज ! दिल्ली में बहसो बा, मुद्दो बा, आ मजो बा. स्लट वाक होई त लोग चउँकी, भूंकी. आ सरकार हरान पुलिस परेशान. चैनल वाला कहीहे सँ वाह क्या सीन है ? हमार देश केहू से कम नइखे. अपना इहाँ सब कुछ नकले नइखे, कूछ मौलिको बा. जइसे लाखन कन्या के पेटे में मुआ दिहल जाला. हर पाँच सेकेन्ड पर एगो महिला रेप के चाहे परिवार के हिंसा के शिकार हो जाले. कतना मेहरारू के आनर कीलिंग के नाँव पर मुआ दिहल जाला आ कतना मेहरारू दहेज के कारण मर जाली सँ. एकरा खातिर ई ललन लोग कवनो वाक नइखे करत लोग आ ना कवनो वाकया होत बा. अपना समाह में औरत आजुओ कमजोर बाड़ी सँ, सरकार औरतन के ताकत दिहलसि लेकिन ताकतवर औरते ओकर प्रचार कर सकेली सँ. कमजोर औरत हमेसा कमजोरे रही. जे ओने बा ऊ एने नइखे. अब नेता लोग ई कमी के ढाँपे ऊ दोसर बात बा. ई सुन के चउँकऽ मत रामचेला आ ना भूंकऽ. इहो एगो खबरे ह.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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