– जयंती पांडेय

लस्टमानंद के साथी नेताजी आजुकाल विपक्ष में बाड़ें आ उहवें एटमासफियर बनावे में लागल रहेले. ऊ जब कई दिन ले काला धन पर कुछ ना बोलले त लस्टमानंद के चिंता हो गइल कि कहीं सत्ता पक्ष में त ना डगरि गइलें. काहे कि भ्रष्टाचार आ घोटाला पर त ऊ बोल-बोल के अकच क दिहले रहले. संसद के चलल आ सरकार के बोलल मुहाल हो गइल रहे. अब ऊ एकदमे चुपा गइले. का बाति हऽ ? इहे चिंता में लस्टमानंद एक दिन नेताजी से भेंट कइले. उनुका के बोले के खातिर उकसावे का गरज से लस्टमानंद बड़ा मेहराइल टोन में कहले, आजु काल्हु कालाधन पर बड़ा बवाल मचल बा.

नेताजी खिसिआइल मुँह बना के बोलले कि, कहला से का होई ?

होई कुछऊ ना. लेकिन ना बोलला से लोग बूझऽता कि कहीं आपहूं के विदेशी बैंक में खाता त नइखे ?

ई बाति सुनि के नेताजी चुपा गइले. आँखि मूंदले आ थोड़ देर बाद ध्यान लगवले. तब कहले, बाबा लस्टमानंद जी, तूं का बूझति बाड़ऽ कि ई सब बिलैक मनी जे बा से अपना देश में चलि आई ?

नेताजी के हालत देखि के लस्टमानंद के जान में जान आइल. कहले, अरे कवना फेर में पड़ गइल बानी ? कुछ नइखे होखे वाला. लेकिन आप एगो बयान देइये दीं.

नेताजी बोलले, ठीक बा.

सत्ता पक्ष के एगो नेता इहे बात लेके मशहूर रहले कि ऊ विरोधी पक्ष के जम के टक्कर देत रहले. अगर विरोधी दल कवनो मामिला उखाड़े त उहो ओतने वजन के कवनो मामिला उखाड़ के ले आवे ले. काला धन के हल्ला से भया के सत्ता पक्ष के नेता लोग उनुका से भेंट कइल आ कहल, कवनो जोगाड़ लगावऽ ना. ई त विरोधी दल के लोग काला धन के मसला उठा के नाक में दम कई दिहले बाड़े सन. का विपक्ष, का मीडिया आ का पब्लिक. सभके बतरस के मौका मिल गइल बा.

नेताजी कहले, त एह में का गलत बा ? हमनियों का कालाधन विदेश से वापिस ले आवे का माँग क देवे के चाहीं.

जे नेता लोग उनुका से मिले आइल रहे ऊ लोग तनि सकपकाइल आ कहल, हमनी का केकरा से माँग करीं सन ? हमनी के सरकारे हऽ.

नेताजी कहले, ऊ सब छोड़ऽ. बस माँग कर द लोग.

नेता लोग बाति बूझि गइल कि धन आवे जाये के ना बा, बस असहीं बतरस के मजा बा. जोगी से ले के चोर ले सब केहूये कालाधन पर कुछ ना कुछ बोलऽता आ मजा लेता.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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