गांवो में फइलल किरकिटिया बेमारी

jayanti-pandey

– जयंती पांडेय

ओह दिन गांव के बूढ़ नथुनी बाबा के देहांत हो गइल. इंडिया आ पाकिस्तान के क्रिकेट मैच रहे ओह दिन. ऊ का दो बीस-बीसा (20-20) कहाला, उहे मैचवा रहे. मुअले सांझ के. आ गांव के नौजवान दल गायब. खाली बूढ़ लोग ओहिजा आइल. बड़ा मुश्किल. आम के लकड़ी काटे के आ कान्ह पर उठा के घाट ले जाए खातिर कुछ नौजवान चाहीं त, लेकिन केहु ना भेंटाइल. अचानक तीन घरी रात गइला पर लोग लउके लागल. का बात हऽ ? पता चलल कि इंडिया पाकिस्तान में क्रिकेट मैच चलत रहे अचानक इंडिया हार गइल. लोग बाहर आ गइल. अब जब नौजवान एकट्ठा भइले सन त तुरतले लकड़ियो के जोगाड़ हो गइल आ बांसो बन्हा गइल. बाबा चलले, संगे रामचेलो. बड़ा कठिन काम. हद हो गइल जब कान्हा पर लाश ले के जा तारे आ पाकिट से मोबाइल निकाल के स्कोर पूछत जा तारे. अब गांव के बात, बाहर लोग के खबर देवे के काम बाबा लस्टमानंद पर सौंपाइल. बाबा से फोन पर एक आदमी पूछलस कि कातना उमिर रहे? बाबा बतवले 98 बरिस. ओने से कहल गइल कि थोड़े आउर ना रुक सकत रहले. विकेटवा जल्दी गिर गइल. बाबा पूछले, का कहऽ तारऽ? ओने से कहल गइल कि आज भर जी जइते त हमनी का मैचवा त ठीक से देख लेतीं सन. कई लोग कहल कि बुढ़ऊ एक दिन आउर जी जइते. खैर केहुं तरह से घेर बटोर के लोग के ले आवे के परल. कई लोग के त ई कहे के परल कि तहार बाप महतारी मुओ ओह दिन मैच होखी त का करबऽ? कान्हे पर टिकठी ले के चले वाला मोबाईल ले के चलत रहे. आज काल त. परवाहियो पर मोबाइल अलाउड बा. अब ऊ कान में मोबाइल लगवले चिलासु बाउंड्री पर. बाबा कहले कि जब लाश ले के चल तार त सब केहु जानऽता कि बुढ़ऊ जिनगी के बाउंड्री पार चल गइले. ना ना हमार कहल ह कि छक्का लगवले बा. तब बुझाइल कि जेकरा बाबा मोबाइल बूझत रहले ऊ त रहे रेडियो ऊ जवान कमेंट्री सुनत रहे. खैर ओकर रेडियो ले लिआइल. बाद में जब आग दिया गइल त एगो धीरे से पूछऽता कि किरिया कहिया ह? दोसरका कहलस कि ओहदिन मैच नइखे हम ठीक से चेक क लिहले बानी. तब त आशा बा कि ओह दिन सौ पचास लोग जुट जाई. बाबा ई सब सुनि के भगवान से प्रार्थना करे लगले कि हे प्रभो जेह दिन हमार मौत होखो ओहि दिन कवनो क्रिकेट मैच मत रहो.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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