– जयंती पांडेय

सबेरे सबेरे राम चेला बतवले कि ठठपाल पांड़े के दुअरा पर मार लोग बिटोराइल बा आ पंचइती हो रहल बा. बाबा तुहूं चलऽ. बात का बा? लस्टमानंद सवचले. रामभरोसे बतवले कि ठठपाल के बेटिया भकजोगनी के केहु लभ लेटर लिखले बा ओह पर फेंकू के बेटा गुडुआ के दस्तखत बा आ ऊ कहऽता कि ऊ त सही कइलहीं नइखे.

त के कइले बा? गुडुआ कहऽता कि पप्पू कइले बाड़े. एही पर झोंझ लागल बा. बाबा चप्पल चटकावत ठठपाल के दुअरा जा चंहुपले. ओहिजा के नजारा दोसरे रहे. पता लागल कि दुअरा पर चिठी गिरल रहे आ पांड़े उठा लिहले, भगजोगनी के हाथ ना लागल. अब ओहपर गुडुआ के सही रहे त उहे धराइल आ जब पांड़े घघोटले त गुडुआ कहऽ ता कि उ नइखे सही कइले. हम पढ़े लिखे से फरका रहेनी त चिठी काहे लिखब?

पांड़े चिलइले, त ई के लिखले बा ? तोहार परान गुडु!
ना ई हम नइखी कइले. ई सही त पप्पू कइलें हँ. अपना दिल के अरमान पूरा करे खातिर चिठी लिखले आ हमरा नांव से सही क दिहले. अइसन लेटर लिखल हमार पालिसी ना ह.

एकरा बाद पप्पू धरइले. पांड़े चटकन उठवले लेकिन रोकि लिहले. कहले का रे अपने चिठी लिखेले आ बेचारा गुडुआ के नांव से सही क दे ले?

पप्पू डेरा गइल कि अब त पिटाई होई. लगलस घिघियाये, ना ए पंडी जी, चिठिया त हमही लिखनी लेकिन सही हमरा सामने गुडु कइले. अब पप्पू के लोग मार-मार कइले बा आ गुडु मोका देखि के भाग चलल. बाद में भगजोगनी गुड्डु से बोले से इंकार क दिहलस, कि जब चिठिये नइखऽ लिखले त बातचीत कइसन. अब गुडु सफाई दे तारे भगजोगिनी से कि ‘परेम असली बा चिठी नकली होला से का होई!’ अरे पिटइला के डर से नीमन नीमन लोग भाग चलेला.

बाबा लस्टमानंद ई सब देखि के कहले ई त लइका हउवन सँ. इहे हाल अपना देस के सांसदो लोग के बा. कई दर्जन सांसद ओबामा के चिठी लिखल कि मोदी जी के वीजा ना दिहल जाउ. अब ऊ चिठिया पकड़ा गइल त एक जाना सांसद कहऽतारे कि, हो, ई त हमार सही ना ह। अपना देश के माननीय सांसद लोग ना जाने काहे अमरीका के आगे घिघियाता ? लाजो नइखे लागत. एक जाना कहऽतारे कि चिठी त लिखाइल ह पर सही नइखी कइले. दोसर कहऽता कि हमरा सामने सही कइले बाड़े. चिठी पकड़इला पर त नीमन नीमन लोग मुकर जाला कि हमार ना ह. अब यदि गुडुआ मुकर गइल त का भइल?


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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