– जयंती पांडेय

सड़क दुर्घटना में एगो वरिष्ठ नेता के मृत्यु हो गइल. उनकर देह तऽ खैर देश के अमानत रहे, से चारू ओर शोक मनावल जात रहे लेकिन नेताजी के आत्मा के देवदूत लोग स्वर्ग के दुआर पर ले आई के खड़ा कऽ दिहल लोग. दुअरा पर एगो सीनियर अधिकारी नेताजी के स्वागत कइलस आ कहलस, माफ कइल जाई, जइसन रोब दाब आ रुतबा आपके धरती पर बा ओकरा मोकाबला में इहवां आपके स्वागत ना कइल जा सके. मगर आप जइसन वीआईपी लोग खातिर हमनी के संविधान में एगो विशेष प्रावधान बा जेकरा मोताबिक आपके एक दिन नरक में गुजारे के होई आ एक दिन स्वर्ग में. फेर ओकरा बाद आप तय करेब कि आप कहां रहेब. पहिले नरक के बारी बा.

नेताजी थोड़ा घबरइले, फेर सोचले कि एक दिन के ही तऽ बात बा. काट लिआई. ऊ नरक जाये के तैयार हो गइले. देवदूत नेताजी के एगो विशाल लिफ्ट में लेके नीचे उतरे लागल. नेताजी के कलेजा ई सोच के कांपत रहे कि पता ना नरक में का होई, लेकिन ऊहां के दृश्य देखकर ऊ गदगद हो गइले. ऊहां एगो बडहन गोल्फ के मैदान रहे. थोड़के दूर पर एगो सुंदर क्लब हाउस रहे. ओकरा लगे नेताजी के कई दोस्त नजर आवत रहे लोग, जिनका साथ मिलके नेताजी कबो करोड़ों के हेरफेर कइले रहले. सब केहू खुश लागत रहे. आसपास एक से एक सुंदर महरारू इतराइल फिरत रहली सन. नेताजी के जवानी के दिन याद आ
गइल.

ऊ लोग बड़ गर्मजोशी से नेताजी के गले लगावल. क्लब में कई प्रकार के मनोरंजक खेल आ डांस के प्रोग्राम आयोजित भइल. असमय मुये के सब दुख दूर हो गइल. सारा गम भुला गइलें. उहां शैतानों आइल जे बहुत खुशमिजाज अउर दोस्ताना रहे. मौज मजा में पते ना चलऽल कि समय कइसे गुजर गइल. देवदूत नेताजी के लेवे आ गइल. सभे लोग नेताजी के बिदा कइल. देवदूत नेताजी के फेर उहे लिफ्ट में लेके चलल. काफी देर ऊपर चलला के बाद स्वर्ग आइल. स्वर्ग रहे तऽ बहुत ही बढिय़ा , मगर नेताजी के ना रुचल. उनका सुभाव के अनुकूल उहां कुछ ना रहे. केहू परिचित ना रहे. बड़ा मुश्किल से ऊ एगो दिन काट पवले. अगिला दिने देवदूत उनके लेवे पहुंचल. उनका के मुख्य कार्यालय ले गइल. उहां उनके एगो फॉर्म दिहल गइल जेकरा में भरे के रहे ऊ कहां रहिहें.

नेताजी राजनीतिक वक्तव्य लेखान कहलें, स्वर्ग तऽ बहुत अच्छा जगह हऽ मगर हमरा बुझाता कि हम नरक में बेसी खुश रह सकेनी. उहे लिफ्ट से देवदूत नेताजी के फेर नरक तक छोड़ गइल. जब नेताजी नरक में ढुकले तऽ उहां के नजारा एकदम बदल गइल रहे. हर ओर उजाड़, गंदगी. लोग गंदा-फाटल कपड़ा पहिनले रहे. ओही समय यमदूत आ के नेताजी के कान्हा पर हाथ रखलस. नेताजी अकबका के देखलें, हमरा बुझात नईखे कि माजरा का बा. काल जब हम इहां आइल रहीं तऽ इहां गोल्फ के मैदान रहे, क्लब हाउस रहे. … पर आज ऊ सब कुछ नइखे. बात का हऽ?

नरक के मुखिया यमदूत अट्टहास कइलस काल हमनी का नरक के पक्ष में आपके वोट लेवे के खातिर एक प्रकार के चुनावी प्रचार करत रहीं सन. वोही के नतीजा रहे कि आप जइसन मशहूर नेता हमनी के सेवा के मौका दिहले. काल्हु के सब तामझाम आपके रिझावे के खातिर रहे. नेताजी समझ गइले कि धरती पर जब ऊ चुनावी प्रचार के दौरान जनता के सब्जबाग देखावेलें और चुनाव के बाद जनता से छल करेनी, तब जनता के असहीं लागत होई.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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