– जयंती पांडेय

जान जा ए रामचेला, ई इंडियन लोग एकदमे बेवकूफ होला. जेकर बड़ाई करे के ओकर मार शिकायत करऽता लोग. बुझाता कि पेट में कलछुल घुमऽता. तनिको चैन नइखे. जवन बात के ईमानदारी आ सच्चाई के सबूत माने के चाहीं ओही के लेके मार मुंह चोरववले रहऽता लोग. अब भगवा झंडा वाला पार्टीं के अध्यक्ष जी के मामला लऽ. सब लोग उनका के घोटालाबाज बतावे खातिर मार अईंठऽता , मीडिया फरके चिल्ला रहल बा. आ ओकर सुनि के गिरहथ विश्वासो कऽ ले ता. लेकिन ई त बेवकूफी हऽ, बिलकुले नामसमझी हऽ. मीडिया तऽ पहिलहीं से पगलाइल बा लेकिन रामचेला तहरा अइसन हुशियार, चालाक आ बुद्धिमान लोग के का भइल बा कि गरीब किसान, मजदूर आ अइसने लोग के विकास कऽ के नया राजनीतिक विकल्प तइयार करे के कोशिश में लागल नेता के बदनाम करे के साजिश नइखे बूझि पावत. नइखे बुझात तऽ चुप रहे के चाहीं लेकिन ना ढोल बजा बजा के चारू इयोर गावत चलऽ ता लोग आ उनका के पद से हटावे के खातिर चल रहल प्रचार में साथ दे ता लोग.

बाबा लस्टमानंद सुर्ती थूकि के रोसा चढ़ा के रामचेला से कहलें कि, ऊ कवन नेता बा ई पृथ्वी पर जे आपन बेटा-बेटी, दमाद, सार, भतीजा, भतीजी आ परिवार के आउर लोग के छोड़ के डराइवर, माली, चौकीदार आ नौकर के अपना कंपनी के डायरेक्टर बनावत होखो. अब देखऽ केतना बड़हन त्याग बा कि जेकरा के ऊ अपना कंपनी के डायरेक्टर बनावऽतारे ओकरा के ऊ नइखन जानत आ ना ऊ लोग जे डायरेक्टर बनऽता ऊ उनका के जानऽता. कइसन गुप्तदान बा ई. अइसन दर्जनों लोग बा जेकरा मालूम नइखे के ऊ नेता जी के कंपनी के डायरेक्टर हो गइल बा. आदमी से प्रेम के त इहे उदाहरण हऽ. ऊ माने नेताजी जेकरा के डायरेक्टर बनवले ओकरा सामने कभी ई ना जाहिर कइले कि ओकरा के एतहत बड़हन पद दिहेले बानी. इहां तऽ लोग दू दिन सुर्ती खिया देला तऽ मार डंका पीटत चलेला कि हम फलाने के सुर्ती खिअवनी हँऽ. नेताजी के ई काम के बड़प्पन ना कहब त का कहबऽ. अबहीं त उनकर महानता के एगो छोट हिस्सा सामने आइल बा. अभी कुछ दिन अउरी दम धरऽ त पता चली कि केतनाह लोग के ऊ बड़हन आदमी बनवले बाड़ें. लोग एगो छोट कंपनी खोले ला त बड़हन जगही जोहेला आफिस वगैरह बनावे के. लेकिन उनकर बड़प्पन देखऽ कि ऊ आपन कंपनी के कार्यालय अइसन गरीब इलाकन के झोपड़ियन में खोललें बाड़ें जहां बड़का त बड़का छोटको नेतवा जाये के ना चहिहें सन. नेताजी एकदम जमीन से जुड़ल आदमी बाड़े. जदि ई नेता जी के प्रधानमंत्री बना दिहल जाउ त उनका प्रेरणा से अइसन नेता लोग के संख्या बढ़ी जाई आ देश के कल्याण हो जाई. दुनिया भर में ई चर्चा होई, वाह रे इंडिया, जहां एगो गरीबो आदमी एगो कंपनी के डायरेक्टर बा आ हर दोसरका तीसरका झोपड़ी में एगो कंपनी के आफिस बा. जान जा, रामचेला कि कभी कभी त बुझाता कि नेताजी के बदनाम करे के ई साजिश हऽ.

बाबा लस्टमानंद के बात सुन के रामचेला चकरा गइलें कि नेता जी के भलऽ कहीं कि बदऽ.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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